मुरादाबाद। कॉसमॉस हॉस्पिटल को लेकर सामने आई शिकायत और आरोपों के बीच अब अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आ गया है। अस्पताल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
ज्ञात हो कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र निवासी शौर्य धर ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी , कि उनकी 58 वर्षीय बहन रिचा द्विवेदी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कॉसमॉस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के नाम पर भारी भरकम रकम वसूली गई। आरोप है कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर राकेश कुमार ने स्वयं को नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) बताकर इलाज किया, जबकि उनके पास संबंधित विशेषज्ञता नहीं है। पीड़ित का कहना है कि 11 दिन के इलाज के दौरान करीब 2.5 लाख रुपये खर्च कराए गए और कई बार डायलिसिस भी कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ।
इसके साथ ही पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में निर्धारित मानकों से अधिक शुल्क वसूला गया और शिकायत करने पर परिवार को धमकियां दी गईं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष :
वहीं कॉसमॉस हॉस्पिटल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल की छवि खराब करने की साजिश बताया है। प्रबंधन के अनुसार, यह शिकायत पूरी तरह मिथ्या और भ्रामक है। जानकारों का कहना है कि नेफ्रोलॉजिस्ट द्वारा डायलिसिस किया जाना पूरी तरह वैध और चिकित्सा मानकों के अनुरूप है।
अस्पताल का यह भी कहना है कि सरकार द्वारा डायलिसिस के जो रेट निर्धारित किए गए हैं, वे मुख्यतः सरकारी अस्पतालों के लिए लागू होते हैं। निजी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और सेवाओं के स्तर के आधार पर शुल्क अलग और अधिक हो सकते हैं, जो पूरी तरह नियमों के अंतर्गत आते हैं।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि झूठी एवं मिथ्या शिकायत संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। कॉसमॉस अस्पताल मंडल भर में चिकित्सा क्षेत्र का एक विश्वसनीय एवं जाना पहचाना नाम है, जो उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराता है।
