मुरादाबाद। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय गौ रक्षा प्रमुख राजकमल गुप्ता, उनकी पत्नी डॉक्टर अर्चना गुप्ता समेत सात लोगों के खिलाफ एक हिंदू महिला की जमीन कथित रूप से हड़पने के आरोप में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने से शहर में सनसनी फैल गई है। मामले में आरोप है कि महिला की पैतृक भूमि को फर्जी आधार कार्ड, कूटरचित दस्तावेजों और कथित फर्जी बैनामे के जरिए दूसरे के नाम दर्ज कराने की साजिश रची गई।
थाना सिविल लाइंस में दर्ज एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी वर्षों पुरानी कृषि भूमि, जिसका स्वामित्व राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, को कब्जाने के उद्देश्य से एक संगठित गिरोह ने जालसाजी का सहारा लिया। आरोप है कि इस कथित साजिश में विहिप नेता राजकमल गुप्ता, उनकी पत्नी डा. अर्चना गुप्ता, प्रॉपर्टी डीलर इब्राहिम, हाजी कलुआ, सावित्री उर्फ गंगादेई, महेन्द्र सिंह और उपदेश ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए तथा जमीन का बैनामा करा लिया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि न तो उसने अपनी जमीन बेची और न ही किसी प्रकार के दस्तावेजों पर सहमति दी। इसके बावजूद कथित रूप से उसकी जगह दूसरी महिला को खड़ा कर फर्जी पहचान के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी जमीन को हड़पने के लिए सुनियोजित तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए और गवाह भी खड़े किए गए।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ गई है कि शिकायत में हिंदू महिला की जमीन हड़पने की कथित साजिश में कुछ मुस्लिम आरोपियों के शामिल होने का भी उल्लेख है। एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर कथित रूप से भूमि कब्जाने की योजना बनाई।
लंबे समय तक कार्रवाई न होने का आरोप लगाने के बाद महिला ने उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई थी। अब पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में राजस्व अभिलेख, रजिस्ट्री दस्तावेज, आधार संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विहिप नेता डॉ. राजकमल गुप्ता का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
यह मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं बल्कि दस्तावेजी जालसाजी, फर्जी पहचान और भूमि माफिया के कथित नेटवर्क की आशंकाओं को भी सामने ला रहा है। शहर में अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर करोड़ों की जमीन के इस विवाद के पीछे सच्चाई क्या है।
