उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल के बीच शुक्रवार को समाजवादी पार्टी का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में नोएडा में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों से मिलने के लिए निकला। हालांकि, नोएडा पुलिस ने कानून-व्यवस्था और धारा 163 का हवाला देते हुए इस दल को डीएनडी फ्लाईवे पर ही रोक दिया।
पुलिस ने पहले ही सपा नेताओं को नोटिस जारी कर नोएडा न आने की सलाह दी थी। बावजूद इसके प्रतिनिधिमंडल के आगे बढ़ने की कोशिश पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस लाइंस पहुंचा दिया। इस कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी ने कड़ा विरोध जताते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
नोएडा हिंसा मामले में कथित पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार को पाकिस्तान कनेक्शन पर भरोसा है, तो उसे उस दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए, न कि विपक्ष को रोकना चाहिए। उनका कहना है कि वे केवल पीड़ित मजदूरों से मिलकर उनकी स्थिति जानने आए थे।
वहीं, सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बातचीत से बच रही है और दमनकारी रवैया अपना रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में मजदूरों को न्यूनतम वेतन भी पर्याप्त नहीं मिल रहा और नीतियां कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मजदूरों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है।
इधर, नोएडा पुलिस का कहना है कि सुरक्षा कारणों के चलते प्रतिनिधिमंडल को बॉर्डर पर रोका गया है। पुलिस के अनुसार, सपा नेताओं की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कराने की तैयारी है। साथ ही, कुछ प्रदर्शनकारी मजदूरों को पुलिस लाइंस लाकर प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कराने की बात भी कही गई है। फिलहाल, डीएनडी बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
