मुरादाबाद। लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे के किनारे, आईएफटीएम यूनिवर्सिटी के बराबर बन रहे एक बड़े अवैध कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स पर आखिरकार कार्रवाई करते हुए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने उसे सील कर दिया है। यह कार्रवाई एमडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) अनुभव सिंह के निर्देश पर सचल दस्ते द्वारा की गई।
बताया जा रहा है कि लुधियाना के कारोबारी हरेंद्र पाल सिंह द्वारा यह निर्माण बिना किसी स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक एनओसी के कराया जा रहा था। करीब 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में बेसमेंट तैयार कर लिया गया था और ऊपर दो मंजिला कॉम्प्लेक्स का ढांचा भी खड़ा कर दिया गया था।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के ठीक किनारे, जहां से एमडीए के अधिकारी और इंजीनियर नियमित रूप से गुजरते हैं, वहां इतना बड़ा निर्माण लंबे समय तक कैसे चलता रहा। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि निर्माण कार्य लगभग एक साल से जारी था, लेकिन प्राधिकरण ने इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए।

मामला जब उच्च स्तर तक पहुंचा, तब जाकर कार्रवाई हुई। एमडीए के इंजीनियरों का कहना है कि निर्माण कार्य “चोरी-छिपे” किया जा रहा था, इसलिए समय पर संज्ञान नहीं लिया जा सका। हालांकि इस दलील पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि निर्माण स्थल हाईवे के बिलकुल किनारे स्थित है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि अवैध निर्माण को नजरअंदाज करने के बदले संबंधित अधिकारियों को ‘मैनेज’ किया गया था।
दिलचस्प बात यह भी है कि छोटे स्तर के अवैध निर्माणों पर सख्ती दिखाने वाला प्राधिकरण इस बड़े प्रोजेक्ट के मामले में केवल नोटिस देकर शांत बैठा रहा। जबकि हाल ही में छोटे निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई के उदाहरण सामने आए हैं।
एमडीए के सीलिंग आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2025 में निर्माण शुरू होने पर संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। अब बिना स्वीकृति और एनएचएआई की अनुमति के निर्माण पाए जाने पर इसे सील किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद जहां एक ओर प्राधिकरण अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में केवल सीलिंग तक कार्रवाई सीमित रहती है या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
