कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि केस से जुड़ा है। अदालत के इस फैसले के बाद खेड़ा की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
दरअसल, पवन खेड़ा ने इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्तियां होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ असम पुलिस की क्राइम ब्रांच में FIR दर्ज की गई।
यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जिनमें चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना और मानहानि जैसी धाराएं शामिल हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.जे. सैकिया की अदालत में करीब तीन घंटे तक चली, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और के.एन. चौधरी ने दलीलें पेश कीं, जबकि राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता देवाजीत सैकिया ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि खेड़ा के देश छोड़कर भागने की कोई आशंका नहीं है और उनकी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।
इससे पहले असम पुलिस की टीम उन्हें तलाशने के लिए हैदराबाद भी पहुंची थी। अब पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उनकी गिरफ्तारी की कोशिश कर सकती है।
