मुरादाबाद। महानगर के लालबाग स्थित प्राचीन श्री काली माता मंदिर और श्री सिद्ध पीठ नौदेवी मंदिर से जुड़ा विवाद अब कानून से हल होगा। इन दोनों मंदिरों से हटाए गए महंतों ने जूना अखाड़े के निर्णय को कानूनी चुनौती दी है, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
सोमवार को महंत राम गिरि महाराज ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर कर अपने पद से हटाए जाने के फैसले को गलत और अवैध बताया। उनके अधिवक्ता राकेश जौहरी के अनुसार, याचिका में जूना अखाड़े से जुड़े कई पदाधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, जिनमें काशी और हरिद्वार के प्रमुख महंतों के साथ-साथ हाल ही में नियुक्त किए गए मंदिर पदाधिकारी भी शामिल हैं।
याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि 8 अप्रैल को जारी किया गया वह पत्र, जिसके आधार पर महंत राम गिरि को पद से हटाया गया, फर्जी और दुर्भावनापूर्ण है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित नए महंतों की नियुक्ति को भी गैरकानूनी बताया गया है।
वाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह मंदिर-मठ करीब 400 वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना नागा संन्यासी परंपरा से जुड़े संत श्री मिश्री गिरिराज जी द्वारा की गई थी। यहां महंत पद का चयन गुरु-शिष्य परंपरा के तहत होता है, जिसमें गुरु के बाद उसका शिष्य ही उत्तराधिकारी बनता है। ऐसे में बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि मंदिर का संबंध काशी स्थित जूना अखाड़े से है, लेकिन महंतों के बदलाव को लेकर वहां से कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ और न ही इस संबंध में कोई अधिकृत बैठक आयोजित की गई।
अब इस पूरे प्रकरण पर अदालत 7 मई को सुनवाई करेगी, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।
