नई दिल्ली। Supreme Court of India ने देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने सभी जिला कलेक्टरों को पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत विशेष कानूनी अधिकार देने का निर्देश दिया है, ताकि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जा सके।
जस्टिस Pankaj Mithal और जस्टिस S. V. N. Bhatti की पीठ ने Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) को निर्देश दिया कि वह Environment (Protection) Act, 1986 की धारा 23 के तहत नोटिफिकेशन जारी करे। इसके माध्यम से जिला कलेक्टरों को धारा 5 के अंतर्गत एक वर्ष के लिए विशेष शक्तियां प्रदान की जाएंगी।
बिजली-पानी काटने तक की कार्रवाई का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर अब उन संस्थानों, अपार्टमेंट्स, होटल, अस्पताल और अन्य “बल्क वेस्ट जेनरेटर” के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेंगे, जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं करेंगे। कलेक्टरों को ऐसे मामलों में पानी और बिजली आपूर्ति बंद कराने जैसे बाध्यकारी निर्देश जारी करने का अधिकार भी दिया गया है।
हर जिले में बनेगी “स्पेशल सेल”
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला कलेक्टर अपने स्तर पर एक विशेष सेल गठित करेंगे, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन की निगरानी करेगी। यह सेल डंपिंग साइट्स का वर्चुअल निरीक्षण करेगी, नियमों के अनुपालन की समीक्षा करेगी और हर दो सप्ताह में रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार के संबंधित सचिव को भेजेगी।
कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिला कलेक्टरों द्वारा जारी निर्देश अदालत के आदेशों को लागू कराने की प्रक्रिया का हिस्सा माने जाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
शहरी निकायों और बड़े संस्थानों पर बढ़ेगा दबाव
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद नगर निगमों, नगर पालिकाओं, औद्योगिक इकाइयों, बड़े आवासीय परिसरों, होटल और अस्पतालों पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश देशभर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
