मुरादाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में वर्ष 2026 की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान न्यायालयों, प्रशासनिक विभागों, बैंकों और बीएसएनएल से जुड़े कुल 2 लाख 19 हजार 331 मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश सै. माऊज़ बिन आसिम ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनित चन्द्रा, पीठासीन अधिकारी एमएसीटी संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उद्दीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत घनेन्द्र कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी एवं बार संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
जनपद न्यायाधीश सै. माऊज़ बिन आसिम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय को आम जनता तक सरल और त्वरित रूप में पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण होने से लोगों का समय और धन दोनों बचते हैं।

शनिवार सुबह से ही जिला न्यायालय परिसर में वादकारियों की भारी भीड़ रही। विशेष रूप से बैंक ऋण, यातायात चालान और बिजली बिल बकाया से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होते हैं और इनके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता।
लोक अदालत के दौरान जिला कारागार मुरादाबाद में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई। साथ ही “एक जनपद एक उत्पाद” और “एक जनपद एक पकवान” से संबंधित स्टॉल लगाकर उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के 13 हजार 182 शमन योग्य वादों का निस्तारण किया गया तथा आरोपितों पर 1 लाख 88 हजार 905 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
उन्होंने बताया कि परिवार न्यायालय एवं अपर परिवार न्यायालय द्वारा वैवाहिक एवं भरण-पोषण संबंधी 265 मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण कराया गया। वहीं उत्तराधिकार से जुड़े एक मामले में 45 लाख 74 हजार 182 रुपये के प्रमाण पत्र जारी किए गए।

इसके अलावा मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से जुड़े 38 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों और उनके परिजनों को 3 करोड़ 9 लाख 78 हजार रुपये देने के आदेश दिए गए। विभिन्न बैंकों के ऋण संबंधी 596 मामलों में समझौता कराते हुए 3 करोड़ 62 लाख 6 हजार 45 रुपये की वसूली भी की गई।
