मुरादाबाद। जनपद में निजी विद्यालयों की मनमानी, फीस वृद्धि और महंगी किताबों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया की अध्यक्षता में जनपदीय शुल्क नियामक समिति, पेरेंट्स टीचर एसोसियेशन (PTA) तथा विभिन्न विद्यालयों के संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभिभावकों के हितों की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और शासन के नियमों के पालन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद के सभी विद्यालय कक्षा 01 से 08 तक तथा कक्षा 09 से 12 तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम और पुस्तकों से संबंधित शासनादेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और बच्चों व अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाले विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

डीएम ने विशेष रूप से विद्यालयों में बार-बार ड्रेस बदलने, अनावश्यक रूप से पुस्तकें बदलने तथा मनमाने तरीके से शुल्क बढ़ाने जैसे मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि इन शिकायतों की अब व्यवस्थित जांच कराई जाएगी। इसके लिए एक विशेष समिति गठित की जा रही है, जो अगले 15 दिनों के भीतर जनपद के विद्यालयों का निरीक्षण करेगी। समिति विद्यालयों के रिकॉर्ड, फीस संरचना, पुस्तकों की सूची, ड्रेस संबंधी निर्देशों और शासनादेशों के अनुपालन की बिंदुवार जांच करेगी।

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन विद्यालयों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन यह भी देखेगा कि कहीं विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य तो नहीं कर रहे हैं।

बैठक में अभिभावक प्रतिनिधियों ने भी कई समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय हर वर्ष नई किताबें और नई ड्रेस लागू कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ मामले की निगरानी करेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डीएम डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। बच्चों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा और शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
