मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को धार की विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर का मूल स्वरूप एक हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और पुरातात्विक अध्ययन को भरोसेमंद मानते हुए कहा कि पुरातत्व विज्ञान आधारित विषय है और उसके निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को निर्देश दिए हैं कि भोजशाला परिसर के संरक्षण, प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा से जुड़े मामलों पर आवश्यक कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, मूलभूत सुविधाएं और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन का दायित्व है।
अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं। वहीं ASI को भोजशाला परिसर का प्रशासन और प्रबंधन जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती को समर्पित प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। जुलाई 2024 में ASI ने विवादित परिसर की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी, जिसके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
गौरतलब है कि अब तक लागू व्यवस्था के तहत ASI इस परिसर की देखरेख करता रहा है। हिंदू श्रद्धालुओं को हर मंगलवार पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत थी।
