मुरादाबाद। सोशल मीडिया और शिकायत पोर्टल के जरिए कॉसमॉस हॉस्पिटल को घेरने की कोशिश आखिरकार जांच में धराशायी हो गई। इलाज में लापरवाही, गलत बिलिंग और डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल उठाने वाली IGRS शिकायत संख्या 40013526015403 को मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच समिति ने पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CMO कार्यालय ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित कर पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई। समिति ने शिकायतकर्ता, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के बयान दर्ज किए, साथ ही मरीज की पूरी मेडिकल फाइल, भर्ती रिकॉर्ड, डायलिसिस दस्तावेज और बिलिंग विवरण की बारीकी से पड़ताल की।
जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि अस्पताल के खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर नहीं, बल्कि अनुमान और भ्रामक जानकारी पर आधारित थे। समिति के अनुसार मरीज को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया और सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप अपनाई गईं।
सबसे बड़ा आरोप बिलिंग में गड़बड़ी का था, लेकिन जांच में अस्पताल के रिकॉर्ड पूरी तरह सही पाए गए। समिति को कहीं भी अतिरिक्त वसूली या वित्तीय अनियमितता का कोई प्रमाण नहीं मिला। वहीं जिन डॉक्टरों की डिग्री और योग्यता पर सवाल उठाए गए थे, उनके शैक्षणिक एवं अनुभव संबंधी दस्तावेज भी पूरी तरह वैध पाए गए।
जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप असत्य, तथ्यहीन और भ्रामक हैं। इसके साथ ही अस्पताल और डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी गई।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि संस्था हमेशा पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध रही है। प्रबंधन का कहना है कि झूठी शिकायतों के जरिए अस्पताल की छवि खराब करने का प्रयास किया गया, लेकिन सच्चाई जांच में सामने आ गई।
स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट के बाद अब चर्चाएं इस बात की भी हैं कि आखिर बिना ठोस आधार के इतनी गंभीर शिकायत दर्ज कराने के पीछे किसकी मंशा थी और क्या यह किसी सुनियोजित बदनाम करने की कोशिश थी।
