भारतीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़े एक अहम कानूनी मामले में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी Board of Control for Cricket in India को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act 2005) के तहत “लोक प्राधिकरण” नहीं माना जाएगा। यानी अब बीसीसीआई पर आरटीआई के तहत जानकारी देने की बाध्यता नहीं होगी।
क्या कहा आयोग ने?
सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बीसीसीआई आरटीआई एक्ट की धारा 2(h) में दी गई “पब्लिक अथॉरिटी” की परिभाषा में नहीं आता। आयोग के अनुसार बीसीसीआई एक निजी संस्था है, जो तमिलनाडु सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत है। इसे न तो संविधान के तहत बनाया गया है और न ही संसद के किसी कानून के जरिए स्थापित किया गया है।
आयोग ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने मामलों — थलप्पलम सर्विस कोऑपरेटिव बैंक बनाम केरल राज्य और ज़ी टेलीफिल्म्स बनाम भारत संघ — का हवाला देते हुए कहा कि बीसीसीआई की कार्यप्रणाली निजी और स्वायत्त प्रकृति की है।
2018 का फैसला पलटा
गौरतलब है कि साल 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने बीसीसीआई को “लोक प्राधिकरण” घोषित किया था और सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। बाद में बीसीसीआई ने इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने मामले को दोबारा विचार के लिए केंद्रीय सूचना आयोग के पास भेज दिया था, जिसके बाद अब नया आदेश जारी हुआ है।
सरकार का ‘गहरा नियंत्रण’ नहीं
आयोग ने कहा कि बीसीसीआई सरकार से कोई बड़ा वित्तीय सहयोग नहीं लेता और उसका संचालन मुख्य रूप से मीडिया अधिकार, प्रायोजन, आईपीएल और टिकट बिक्री से होने वाली कमाई पर आधारित है। कर छूट या अन्य कानूनी सुविधाओं को “महत्वपूर्ण सरकारी वित्तपोषण” नहीं माना जा सकता।
आईपीएल और भारतीय बाज़ार का असर
आयोग ने यह भी माना कि बीसीसीआई अब वैश्विक क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बन चुका है और इसकी वित्तीय ताकत भारतीय क्रिकेट बाज़ार और Indian Premier League की सफलता से आती है। आदेश में कहा गया कि अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप इस आर्थिक ढांचे और खेल प्रशासन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब खेल मंत्रालय को बीसीसीआई से जुड़ी जानकारी मांगते हुए एक आरटीआई आवेदन मिला। मंत्रालय ने जवाब दिया कि संबंधित जानकारी उसके पास उपलब्ध नहीं है और बीसीसीआई एक निजी संस्था है।
आयोग के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि यदि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाना है, तो इसके लिए संसद को नया कानून बनाना होगा या सरकार को विशेष कानूनी व्यवस्था करनी होगी। हालांकि आयोग ने यह भी कहा कि इतने बड़े खेल संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद जरूरी है।
