अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में अतिक्रमण और अवैध कब्जों का जाल इस कदर फैल चुका है कि जहां सफ़र जोखिम भरा हो गया है वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक संपत्तियां अब निजी जागीर में तब्दील होती नजर आ रही हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली के ट्रांसफार्मर की आड़ लेकर नाले नालियों को पाटकर उन पर भारी-भरकम जेनरेटर स्थापित कर दिए गए हैं।
फुटपाथों और ग्रीन बेल्ट पर कब्जों का आलम यह है कि कहीं बैरिकेडिंग कर निजी फुलवारी सजाई गई है, तो कहीं इन्हें सुरक्षा कक्षों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़कों पर अवैध रूप से लगे होर्डिंग और बोर्ड न केवल यातायात को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। अतिक्रमण की यह गंभीर समस्या जनपद के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर विकराल रूप धारण कर चुकी है।

बदायूं-बिल्सी स्टेट हाईवे-51 और दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-09 को क्रॉस करने वाला गजरौला का मुख्य चौपला और दिल्ली की ओर जाने वाली जोया की सर्विस रोड वर्तमान में अतिक्रमण के कारण बेहद संकरी हो चुकी है, जिससे यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी तरह मंडी धनौरा की शेरपुर चुंगी, चौधरी चरण सिंह पार्क और कलाली की ओर जाने वाले मार्गों पर बिजली के ट्रांसफार्मरों की आड़ में अवैध कब्जे जमा लिए गए हैं। महादेव चुंगी समेत अमरोहा नगर के तमाम चौराहे, मुख्य सड़कें और गलियां भी इस समस्या से बुरी तरह जूझ रही हैं।
विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र गजरौला के अल्लीपुर चौपला यानी ओवरब्रिज से चांदपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थानीय दुकानदारों की मनमानी के कारण रोडवेज बसों के यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां दुकानदार अपनी दुकानों के सामने फुटपाथों पर खान-पान और फलों के ठेले लगवा रहे हैं, जिसके कारण रोडवेज बसों के रुकने तक की जगह नहीं बची है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जब बस चालक या परिचालक बस खड़ी करने का प्रयास करते हैं, तो ये अवैध कब्जेदार उनके साथ सरेआम अभद्रता और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।

विकास के दावों के उलट धरातल पर सड़कें टूटी हुई हैं, नाले चोक हैं और जनता जलभराव की समस्या से बेहाल है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र इस अव्यवस्था पर पूरी तरह मौन साधे हुए है। यह विचित्र विडंबना है कि एक ओर सुरक्षित सफ़र के लिए सड़कों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ बुनियादी ढांचे यानी फुटपाथों को कब्जामुक्त करने तथा उनकी सुरक्षा सतत निगरानी की विभागीय अनदेखी की वजह से कमजोर पड़ रही है। यह अव्यवस्था यात्रियों पर भारी पड़ रही है।
सरकार की ओर से विश्वस्तरीय बनाने के दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि कब और कहां हादसा हो जाए इसकी आशंका हमेशा बनी रहती है। अकेले पुलिस के कंधों पर सारी जिम्मेदारी डाल कर कभी भी फुटपाथों पर अवैध क़ब्ज़ों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। क्योंकि संबंधित नगरपालिका प्रशासन लोगों की नाराज़गी से बचने की रणनीति के तहत अतिक्रमण हटाने के प्रयास तक नहीं करता। अतिक्रमण हटवाना ट्रैफिक या नागरिक पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है।
