मुरादाबाद। स्कॉलर डेन कोचिंग संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर इन दिनों लगातार विवादों और कानूनी मामलों के केंद्र में हैं। 10 लाख रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद अब सागर सिक्योरिटी कंपनी की संचालक रमा भारद्वाज द्वारा 35 लाख रुपये से अधिक के भुगतान न किए जाने का आरोप लगाते हुए एक और मुकदमा दर्ज कराया गया है। इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर विवेक ठाकुर के खिलाफ प्रतिक्रियाओं की मानो बाढ़ आ गई है।
मामलों के तूल पकड़ने के बाद विवेक ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष रखा और दोनों मुकदमों को निराधार एवं झूठा बताया। उन्होंने दावा किया कि 10 लाख रुपये के भुगतान संबंधी मामले में उनका और उनके संस्थान का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनके अनुसार जनवरी माह में आयोजित उदीषा चौपला कार्यक्रम के लिए गठित विभिन्न समितियों में वे केवल एक सदस्य थे और भुगतान की जिम्मेदारी आयोजन समिति की थी।
इसी प्रकार सागर सिक्योरिटी कंपनी की ओर से दर्ज कराए गए लगभग 35 लाख रुपये से अधिक के बकाया भुगतान के मुकदमे को भी विवेक ठाकुर ने गलत बताते हुए अपने पक्ष में कई तर्क प्रस्तुत किए। हालांकि उनकी इस सफाई को शिकायतकर्ता पक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया है।
सागर सिक्योरिटी कंपनी की संचालक रमा भारद्वाज का दावा है कि विवेक ठाकुर द्वारा सोशल मीडिया पर दी जा रही सफाई पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। उनका कहना है कि उनके पास विवेक ठाकुर, उनके स्टाफ तथा उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के साथ हुई बैठकों, बातचीत और वॉइस नोट्स सहित अनेक महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। रमा भारद्वाज के अनुसार उन्होंने ये सभी दस्तावेजी एवं डिजिटल प्रमाण पुलिस को उपलब्ध कराए हैं और इन्हीं साक्ष्यों के परीक्षण तथा जांच के बाद पुलिस ने विवेक ठाकुर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।
रमा भारद्वाज का आरोप है कि विवेक ठाकुर अब सोशल मीडिया पर आकर मामले की वास्तविकता से ध्यान भटकाने तथा स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार तथ्यों और साक्ष्यों की अनदेखी कर सोशल मीडिया पर अलग कहानी पेश की जा रही है, जबकि जांच एजेंसियों के समक्ष उपलब्ध कराए गए प्रमाण कुछ और ही तस्वीर दिखाते हैं।
उधर फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोगों ने विवेक ठाकुर की पोस्ट पर टिप्पणियां करते हुए बकाया भुगतान, पुराने लेन-देन और विभिन्न विवादों को लेकर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने कथित तौर पर सिक्योरिटी एजेंसी, ट्रैवल एजेंसी और अन्य लोगों के भुगतान का मुद्दा उठाते हुए पहले देनदारियां चुकाने की सलाह दी। कुछ टिप्पणियों में तीखी आलोचना भी देखने को मिली, जबकि कुछ लोगों ने कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताने की बात कही।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कमेंट्स के बीच एक और आरोप चर्चा का विषय बना हुआ है। कई यूजर्स का दावा है कि विवेक ठाकुर अथवा उनके समर्थकों द्वारा उनके विरुद्ध की जा रही आलोचनात्मक टिप्पणियों को लगातार हटाया या डिलीट कराया जा रहा है। कुछ लोगों ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया कि सवाल पूछने वाले अथवा आलोचनात्मक कमेंट्स कुछ समय बाद पोस्ट से गायब हो जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में विवेक ठाकुर की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर सामने आ रही प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि मामला अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक जनचर्चा का विषय बन चुका है। लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों, शिकायतकर्ता पक्ष के दावों, सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों तथा कमेंट्स डिलीट किए जाने के आरोपों ने इस विवाद को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।
फिलहाल दोनों मामलों की जांच पुलिस स्तर पर जारी है। आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इतना जरूर है कि एक के बाद एक दर्ज हो रही एफआईआर, शिकायतकर्ताओं के गंभीर आरोप और सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध ने स्कॉलर डेन प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
