कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर अदालत दखल नहीं दे सकती।
सुनवाई के दौरान नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि जिस मामले का खुलासा न करने का आरोप लगाया गया है, वह केवल एक निजी शिकायत से जुड़ा था और उसमें अदालत ने अभी तक किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया था। सिंघवी ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उम्मीदवार को उन मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हों।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि नामांकन पत्र खारिज होने के बाद उम्मीदवार के पास चुनाव याचिका के माध्यम से उचित मंच पर चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध रहता है। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या ऐसा कोई न्यायिक उदाहरण मौजूद है जिसमें अदालत ने इस तरह के मामले में चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप किया हो।
मामला मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नटराजन के नामांकन पत्र से जुड़ा है। निर्वाचन अधिकारी ने उनके शपथपत्र में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित शिकायत का उल्लेख न होने को आधार बनाते हुए नामांकन निरस्त कर दिया था। शिकायत बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की ओर से उठाई गई थी। निर्वाचन अधिकारी का कहना था कि फॉर्म-26 में पूरी जानकारी न देना अधूरा शपथपत्र दाखिल करने के समान है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब नटराजन के लिए चुनाव याचिका दाखिल कर आगे कानूनी लड़ाई लड़ने का रास्ता खुला है।
