नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कहीं चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन बाद में हालात अचानक हिंसक कैसे हो गए, इसकी पड़ताल जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं—या तो पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया, या फिर प्रदर्शन में ऐसे तत्व शामिल हो गए जिन्होंने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार होने से ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस को हिंसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के मौजूद थे और उन्होंने भी हथियारों के साथ कार्रवाई में हिस्सा लिया।
वकील ने अदालत से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की डिजिटल तकनीक के जरिए पहचान कर सार्वजनिक किए जाने पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि इनमें कई छात्र और नाबालिग भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान बिहार में प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। एक वकील ने अदालत को बताया कि वहां 13 वर्ष तक के बच्चों को भी हिरासत में लेने के आरोप हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जुनैद से जुड़े कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह वर्तमान मामले से अलग विषय है।
