अमरोहा/मुरादाबाद। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भाजपा के मीडिया संवाद कार्यक्रमों के बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति और पत्रकार संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ पत्रकारों ने कई महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कार्यक्रमों में सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया गया, लेकिन मुरादाबाद मंडल की जमीनी समस्याओं, पत्रकारों की सुरक्षा और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के संरक्षक तुलाराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाना आवश्यक है, लेकिन मुरादाबाद और अमरोहा में वर्षों से सक्रिय भू-माफियाओं, अवैध प्लॉटिंग, सरकारी भूमि पर कब्जों और खनन माफियाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई तथा भविष्य की रणनीति पर भी सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता और पत्रकार दोनों यह जानना चाहते हैं कि इन गंभीर समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

समिति के जिलाध्यक्ष महिपाल सिंह ने कहा कि मीडिया संवाद का वास्तविक उद्देश्य संवाद होना चाहिए, केवल एकतरफा जानकारी देना नहीं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि मुरादाबाद और अमरोहा में बढ़ते अवैध निर्माण, अतिक्रमण, भू-माफियाओं की गतिविधियों तथा प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों पर कार्यक्रम में कोई चर्चा क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर जनता लगातार सवाल उठा रही है, लेकिन जिम्मेदार मंचों पर इनके जवाब नहीं मिलते।
महिपाल सिंह ने कहा कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कल्याण और सुरक्षा का मुद्दा भी पूरी तरह उपेक्षित है। पत्रकार जनहित के मुद्दों को उठाते हैं, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करते हैं, लेकिन उनके हितों की रक्षा के लिए शासन और प्रशासन के स्तर पर अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती। पत्रकारों की सुरक्षा, दुर्घटना सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं, आवासीय योजनाओं और अन्य कल्याणकारी व्यवस्थाओं को लेकर लंबे समय से मांगें उठती रही हैं, लेकिन इन पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती।
यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के सचिव डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा कि मुरादाबाद शहर लंबे समय से जाम की विकराल समस्या से जूझ रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता, व्यापारी और विद्यार्थी प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया संवाद में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार और प्रशासन की क्या कार्ययोजना है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निजी विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और शिक्षा कारोबार से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अभिभावकों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। अनेक परिवार बढ़ती फीस और अतिरिक्त शुल्कों के बोझ से परेशान हैं। ऐसे में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा अपेक्षित थी।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा का प्रश्न भी बेहद महत्वपूर्ण है। कई बार पत्रकारों को खबरों के संकलन के दौरान दबाव, धमकियों और विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद पत्रकार सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं धरातल पर प्रभावी रूप से लागू होती दिखाई नहीं देतीं। सरकार और प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति और ठोस पहल करनी चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकारों और समिति के पदाधिकारियों ने आईजीआरएस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता यह आरोप लगाते हैं कि कई मामलों में शिकायतों का वास्तविक निस्तारण किए बिना औपचारिक रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद कर दिया जाता है। यदि ऐसा है तो शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
पत्रकार नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में उपलब्धियों का उल्लेख महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता और पत्रकारों से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा उससे भी अधिक आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में आयोजित होने वाले मीडिया संवाद कार्यक्रमों में स्थानीय समस्याओं, पत्रकार सुरक्षा, पत्रकार कल्याण, भू-माफियाओं, खनन माफियाओं, अवैध निर्माण, अतिक्रमण, शिक्षा क्षेत्र की अनियमितताओं, जाम की समस्या और आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण जैसे विषयों पर भी खुलकर चर्चा की जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद तभी सार्थक माना जाएगा जब सत्ता जनता और पत्रकारों के सवालों को सुनने तथा उनका जवाब देने की जिम्मेदारी भी निभाए। मुरादाबाद और अमरोहा के नागरिकों के साथ-साथ पत्रकार समाज भी अब इन महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट उत्तर चाहता है।
