अमरोहा। शासन को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का भारी-भरकम राजस्व देने वाली स्थानीय तहसील इस समय स्वयं अपनी बदहाली के आंसू रो रही है, जिससे क्षुब्ध होकर स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नगर में व्याप्त भयंकर अव्यवस्थाओं, पेयजल संकट, टूटी सड़कों और छांव की कमी जैसी बुनियादी समस्याओं से रोजाना जूझती जनता ने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ लफ़्ज़ों में कहा है कि अब बहुत हुआ, और यदि व्यवस्थाओं में अविलंब सुधार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन के लिए विवश होंगे।

प्राप्त विवरण के अनुसार, इस तहसील क्षेत्र से सरकार के राजकोष में हर साल भारी राजस्व जमा किया जाता है, जिसके बावजूद नगर में न्यूनतम नागरिक सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हो पा रही हैं। नगर के कलाली रोड क्षेत्र में दोषपूर्ण जल निकासी व्यवस्था और नालों पर किए गए अवैध अवरोधों के कारण स्थानीय जनता को नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पिछले दिनों हुई प्री-मानसून बरसात, आंधी और तूफान ने पूरे शहर की सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सारे शहर के नाले गंदगी और कीचड़ लेकर सड़कों पर उफन आए हैं, जिससे जगह-जगह फैले कूड़े के ढेर ने नागरिकों का पैदल चलना भी दूभर कर दिया है। विडंबना यह है कि यह स्थिति तब बनी हुई है जब नगर पालिका व स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारी, व जनप्रतिनिधि रोजाना सड़कों पर सफाई का दावा करते नजर आते हैं, जिससे अब जनता में यह चर्चा आम है कि धरातल पर काम होने के बजाय सिर्फ अखबारों में फोटो छपवाने के लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि और कलाली मार्ग से जुड़े मुख्य नालों की सफाई समय पर नहीं कराई गई। आधे से ज्यादा नालों पर व्यापारियों और रसूखदार दुकानदारों ने पक्के अतिक्रमण कर उन्हें पूरी तरह बंद कर रखा है, जिसके कारण उनकी आंतरिक सफाई संभव नहीं हो पा रही है। इसी का नतीजा है कि गलियों की नालियां ऊपर तक चोक हो चुकी हैं। नालों का जलस्तर बढ़ा होने के कारण गलियों का पानी मुख्य बहाव में नहीं मिल पा रहा है और मामूली बारिश होते ही पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। विशेष रूप से कलाली रोड पर हीरो मोटोकॉर्प शोरूम एजेंसी एवं चमन सिंह के निर्माणाधीन मकान के सामने से गुजरने वाले बाढ़ खंड नाले को प्रेम जैन के मकान के बाद कौशल जैन के पास पूरी तरह मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया है। इसके अलावा डॉ. सिद्धराज की ओर जाने वाली गली के समीप पेड़ के नीचे स्थित मुख्य पुलिया, जो नगर की जल निकासी का सबसे प्रमुख माध्यम थी और जिसका पानी हीरो मोटोकॉर्प एजेंसी से सीधे बाढ़ खंड नाले में गिरता था, उसे भी पाट दिया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चांदपुर रोड को क्रॉस करने वाली पुलिया को भी मनमाने तरीके से बंद किए जाने के कारण बरसात का पानी आगे नहीं बढ़ पाता। परिणाम स्वरूप बाढ़ खंड नाला ओवरफ्लो होकर सीधे एम.एस. स्कूल तक बैक मारता है और आसपास के रिहायशी घरों को अपनी चपेट में ले लेता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि हल्की सी फुहार पड़ते ही पुराने लॉकडाउन समोसे की दुकान और छोटे सुनार के अहाते के सामने कलाली रोड तालाब का रूप अख्तियार कर लेती है। इस जलभराव के कारण क्षेत्र की व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह चौपट हो गई हैं, जिससे क्षुब्ध होकर लॉकडाउन समोसे के मालिक जितेंद्र सैनी को अपनी चलती हुई दुकान बंद कर शेरपुर चुंगी पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही नहीं, गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. नेहा सिंह द्वारा संचालित एमएसआई हॉस्पिटल में भी पानी भरने के कारण मरीजों की संख्या पर भारी प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके साथ ही बर्फ फैक्ट्री और कजारिया टाइल्स शोरूम के सामने जलभराव होने से उनकी दैनिक बिक्री और व्यापारिक साख पूरी तरह प्रभावित हुई है।

इस चिरकालिक समस्या के कारण कलाली रोड के इर्द-गिर्द स्थित जमीनों, भूखंडों और बने-बनाए मकानों की बाजार कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे संपत्ति स्वामियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि कलाली रोड कोई सामान्य मार्ग नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की पॉश कॉलोनियों, घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों, चौधरी चरण सिंह पार्क, विभिन्न नामचीन विद्यालयों, चिकित्सालयों तथा दर्जनों गांवों को नगर से जोड़ने वाली मुख्य लाइफलाइन है। इस महत्वपूर्ण मार्ग की इस कदर उपेक्षा से नागरिकों में गहरा रोष है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक या ढांचागत संकट में जिन लोगों की जिम्मेदारी सबसे कम होती है, अक्सर वही उसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं। गाद व गंदगी से अटे पड़े नाले-नालियां हों या कोई प्राकृतिक आपदा, उसका सबसे गहरा और दर्दनाक असर हमेशा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। नासूर बन चुकी नगर की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किए बगैर केवल गलियों की सड़कों को ऊंचा उठाने से सिर्फ फौरी तौर पर राहत मिल जाती है, लेकिन मूल समस्या का समाधान न होने से बरसात शुरू होते ही स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस बेहद संवेदनशील व जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दे पर तत्काल कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है।




नागरिकों की मांग है कि आंबेडकर रोड और कलाली मार्ग के सभी नालों से हर प्रकार के अवैध अतिक्रमण को अविलंब हटाया जाए, मिट्टी डालकर बंद की गई पुलियाओं और बाढ़ खंड नाले को दोबारा खुलवाया जाए और पूरी कार्ययोजना बनाकर जल निकासी का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जलभराव की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अतिक्रमणकारी व्यापारियों को भी अपनी संकीर्ण मानसिकता छोड़कर जनहित में सहयोग करना चाहिए, जिससे इसके साथ लगी हुई कॉलोनियों के निवासी बरसात में होने वाले जलभराव से हमेशा के लिए निजात पा सकें।
