मुरादाबाद। नगर निगम की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के कई पार्षदों ने अपनी ही पार्टी के महापौर विनोद अग्रवाल के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। भाजपा के करीब एक दर्जन पार्षदों ने महापौर पर जनप्रतिनिधियों का अपमान करने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने तथा धमकी भरा व्यवहार अपनाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदेश नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है।
पार्षदों ने सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि नगर निगम में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को सम्मानजनक वातावरण नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि महापौर द्वारा बैठकों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान पार्षदों के साथ बार-बार अपमानजनक व्यवहार किया जाता है, जिससे जनप्रतिनिधियों के सम्मान और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष को भेजा गया शिकायत पत्र
वार्ड-37 के पार्षद एवं नगर निगम उपसभापति शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि महापौर की कार्यशैली और भाषा शैली लंबे समय से विवाद का विषय बनी हुई है तथा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।

शिकायत में कहा गया है कि निगम की बैठकों के दौरान पार्षदों के प्रति असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। पार्षदों का दावा है कि कई अवसरों पर महिला पार्षदों की मौजूदगी में भी असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें असहज और अपमानित महसूस करना पड़ा।
कार्यकारिणी बैठक के बाद बढ़ा विवाद
पार्षदों द्वारा भेजे गए पत्र में 12 जून को आयोजित कार्यकारिणी बैठक का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि महापौर के अनुच्छेद व्यवहार को देखते हुए कोई भी कार्यकारिणी सदस्य बैठक में नहीं पहुंचा। इसके बाद 14 जून को हुई बैठक में उनके संबंध में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान ऐसे शब्दों का भी प्रयोग किया गया जिन्हें वे धमकी की श्रेणी में मानते हैं।
“जनता ने चुनकर भेजा है, सम्मान भी मिलना चाहिए”
विरोध कर रहे पार्षदों का कहना है कि वे जनता के मतों से निर्वाचित होकर सदन तक पहुंचे हैं और उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्तमान परिस्थितियों में पार्षदों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा तथा उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार नहीं किया जाता।
पार्षदों ने प्रदेश नेतृत्व से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा है कि संगठन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए इस मुद्दे का समाधान जरूरी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इससे पार्टी और नगर निगम दोनों की छवि प्रभावित हो सकती है।
महापौर का पक्ष नहीं आया सामने
इस पूरे मामले में महापौर विनोद अग्रवाल का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। उनके पक्ष के सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संभावित उपशीर्षक
बैठकों में अभद्र भाषा और धमकी के आरोपों से बढ़ा विवाद
जनप्रतिनिधियों के सम्मान का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
