मुरादाबाद/अमरोहा।
देश में लगातार बढ़ते कोचिंग कल्चर और उससे जुड़ी चुनौतियों के बीच एक नया दृष्टिकोण सामने आया है, जिसके अनुसार यदि देश के सभी कोचिंग संस्थान बंद हो जाएं, तो भी छात्रों के डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या पीसीएस बनने और नौकरी पाने की राह में कोई बाधा नहीं आएगी। बल्कि इसके विपरीत, कोचिंग सेंटरों के बंद होने से विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर शैक्षणिक और मानसिक लाभ होगा, जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के इस विचार के पीछे कई महत्वपूर्ण तर्क हैं, जो सीधे तौर पर अभिभावकों के साथ छात्र हित और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़े हैं। सबसे पहली और मुख्य बात यह है कि कोचिंग संस्थानों के बंद होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक जैसी धांधलियों और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।
इसके साथ ही, कोचिंग के भारी-भरकम बोझ से मुक्त होकर बच्चे अपनी स्कूली शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और बुनियादी पढ़ाई के लिए ज्यादा मेहनत करेंगे। रेडीमेड नोट्स और रटने की प्रवृत्ति से दूर रहने के कारण छात्रों में खुद से पढ़ने की आदत विकसित होगी, जिससे उनका आत्मनिर्भरता का भाव बढ़ेगा और वास्तविक आत्मविश्वास जागृत होगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि छात्र हॉस्टलों या बाहरी माहौल के बजाय अपने घरों में रहकर पढ़ाई करेंगे, जिससे वे हर समय माता-पिता की सीधी निगरानी और देखरेख में रहेंगे। इससे न केवल उनके भटकाव की आशंका कम होगी, बल्कि उनका मानसिक और नैतिक विकास भी बेहतर होगा।
