अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 18 साल बाद एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्पेशल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद को बरकरार रखा है।
हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। फैसले के अनुसार, धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये, जबकि 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स में विस्फोटक छिपाकर बसों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और यहां तक कि अस्पतालों को भी निशाना बनाया था। धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से कई जिंदा बम भी बरामद किए गए थे।
इन हमलों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन धमाकों को वर्ष 2002 के गुजरात दंगों का बदला लेने की साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।
मामले की जांच के दौरान 78 लोगों को आरोपी बनाया गया और 35 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया गया, जहां करीब 14 वर्षों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद फरवरी 2022 में फैसला सुनाया गया था।
स्पेशल कोर्ट ने 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर 28 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। यह भारतीय न्यायिक इतिहास का पहला मामला था, जिसमें एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई।
सुनवाई के दौरान 1,150 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 6,700 से ज्यादा पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया गया। स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
