मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित नई तहसील के समीप बने वासुदेव कॉम्प्लेक्स और उसमें संचालित रहे स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर भवन के निर्माण, उपयोग और उससे जुड़े कानूनी घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) से जुड़े सूत्रों ने एक नई जानकारी दी है। सूत्रों के अनुसार कॉम्प्लेक्स की नियमानुसार नाप-जोख और कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी सील खोले जाने की संभावना है। हालांकि किसी भी परिस्थिति में इस भवन में दोबारा कोचिंग संस्थान संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक वासुदेव कॉम्प्लेक्स का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित भवन मानकों के अनुरूप नहीं हुआ था। बताया जा रहा है कि निर्माण के दौरान अनिवार्य सेटबैक सहित कई मानकों का पालन नहीं किया गया। यदि अभिलेखों में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो भवन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय एमडीए की जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही होगा।
शोरूम के लिए स्वीकृति, कोचिंग का संचालन
एमडीए से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह परिसर एक डॉक्टर दंपति के स्वामित्व में है। भवन का नक्शा कपड़ों के शोरूम के लिए स्वीकृत कराया गया था, लेकिन बाद में उसी भवन में स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान संचालित किया जाने लगा। सूत्रों के अनुसार यदि भवन उपयोग परिवर्तन (चेंज ऑफ यूज) की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई, तो यह भवन उपविधियों और भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसी कथित अनियमितता के आधार पर एमडीए ने नोटिस जारी करने के बाद परिसर को सील किया था।
सूत्रों का यह भी दावा है कि स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान के पास अग्निशमन विभाग सहित अन्य आवश्यक विभागों की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में संस्थान के संचालन की वैधता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
सील खुल सकती है, लेकिन कोचिंग नहीं चलेगी
एमडीए से जुड़े सूत्रों के अनुसार यदि भवन स्वामी नियमानुसार नाप-जोख, कंपाउंडिंग और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर लेते हैं तो परिसर की सील खोले जाने की संभावना है। लेकिन भवन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा, जिसके लिए उसका नक्शा स्वीकृत किया गया था। ऐसे में इस परिसर में दोबारा किसी भी कोचिंग संस्थान के संचालन की अनुमति मिलने की संभावना नहीं है। इससे स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईकोर्ट की रिट से बढ़ी कानूनी पेचीदगी
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब सूत्रों के मुताबिक स्कॉलर्स डेन के संचालक विवेक ठाकुर ने एमडीए की सीलिंग कार्रवाई को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। चर्चा है कि इस याचिका में भवन स्वामी डॉक्टर दंपति का नाम भी वादी के रूप में शामिल कर लिया गया, जबकि उन्हें इसकी जानकारी अथवा सहमति नहीं थी।
वासुदेव कॉम्प्लेक्स से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इसकी जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर दंपति ने इस पर आपत्ति जताई और विवेक ठाकुर से रिट वापस लेने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि इससे भवन की सील खुलवाने के लिए उनकी ओर से की जा रही अलग प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भवन स्वामी के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की चर्चा
सूत्रों के अनुसार विवेक ठाकुर ने भवन स्वामी के विरुद्ध भी हाईकोर्ट में कानूनी कार्यवाही शुरू की है। बताया जा रहा है कि इसका आधार दोनों पक्षों के बीच हुआ कथित पांच वर्ष का किरायानामा है। दावा किया जा रहा है कि इस समझौते के रहते भवन स्वामी एकतरफा तरीके से संस्थान को परिसर खाली करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। हालांकि यह मामला न्यायालय में किस स्थिति में है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सुचित्रा परिसर का भी जिक्र
सूत्रों का यह भी दावा है कि स्कॉलर्स डेन के संचालक इससे पहले कांठ रोड स्थित सुचित्रा परिसर में भी संस्थान संचालित कर चुके हैं। आरोप है कि उस दौरान कई महीनों तक किराया नहीं दिया गया और बाद में भवन स्वामी भी कानूनी विवादों में उलझ गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है तथा संबंधित पक्ष का पक्ष भी उपलब्ध नहीं हो पाया है।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
स्कॉलर्स डेन के बंद होने के बाद सबसे अधिक परेशानी हजारों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को उठानी पड़ रही है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, जबकि जमा की गई फीस को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।
फिलहाल सभी की निगाहें मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की अगली कार्रवाई और न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर टिकी हैं। उपलब्ध अभिलेखों, वैधानिक अनुमतियों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि वासुदेव कॉम्प्लेक्स, उसके उपयोग और स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान से जुड़े विवाद का अंतिम समाधान किस दिशा में जाता है@शांतनु/INN
