मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुरादाबाद देहात (27) विधानसभा को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। चुनाव दर चुनाव यहां सत्ता के समीकरण बनते-बिगड़ते रहे, लेकिन यदि किसी चीज़ में बदलाव नहीं आया तो वह है विकास का अभाव और आम जनता की बदहाली। चुनावी मंचों पर किए गए बड़े-बड़े दावे और धरातल पर दिखाई देने वाली तस्वीर के बीच का अंतर आज भी लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
जिला मुख्यालय से सटा होने के बावजूद मुरादाबाद देहात के अनेक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई संपर्क मार्ग बदहाल हैं, स्वास्थ्य सेवाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं, जलनिकासी, शिक्षा, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास के अनेक वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही क्षेत्र की समस्याएं फिर हाशिए पर चली जाती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखाई जाती है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी हालात में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता। कई ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र में सक्रियता काफी कम हो जाती है और लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इधर, आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। क्षेत्र में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि विभिन्न दावेदार अपने-अपने समर्थन में माहौल बनाने के लिए गांव-गांव संपर्क अभियान चला रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार मुरादाबाद देहात की जनता केवल चुनावी नारों और वादों पर भरोसा करेगी, या फिर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे वास्तविक विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देकर अपना फैसला सुनाएगी?
आने वाला चुनाव केवल राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की परीक्षा नहीं होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि मुरादाबाद देहात की जनता अब वादों की राजनीति चाहती है या विकास की। क्षेत्र के मतदाताओं की निगाहें इस बार उन नेताओं पर होंगी जो केवल भाषण नहीं, बल्कि अपने काम का ठोस हिसाब भी जनता के सामने रख सकें@जफर/INN
