रामपुर। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठन आज़ाद अधिकार सेना ने निष्पक्षता, पारदर्शिता और समान कानून लागू करने की मांग उठाई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने जिलाधिकारी एवं रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर कहा है कि यदि किसी निर्माण में अनियमितता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई अवश्य हो, लेकिन वह संविधान, प्राकृतिक न्याय और ‘रूल ऑफ लॉ’ के सिद्धांतों के अनुरूप समान रूप से की जानी चाहिए।
हर भवन की अलग-अलग जांच कर हो निर्णय
पत्र में मांग की गई है कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक भवन का उपलब्ध अभिलेखों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग परीक्षण किया जाए। जहां नियमितीकरण अथवा अन्य वैधानिक विकल्प उपलब्ध हों, वहां ध्वस्तीकरण से पहले उन विकल्पों पर विचार किया जाए।
छात्रों और शिक्षकों के हितों की सुरक्षा पर दिया जोर
आज़ाद अधिकार सेना ने कहा है कि यदि किसी भवन का ध्वस्तीकरण अपरिहार्य हो, तो उससे पहले विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के शैक्षणिक एवं वैधानिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उनके लिए समुचित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
‘सभी संस्थानों पर लागू हों समान मानदंड’
संगठन ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि जो मानदंड जौहर विश्वविद्यालय पर लागू किए जा रहे हैं, वही प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, व्यावसायिक परिसरों तथा सरकारी भवनों पर भी समान रूप से लागू किए जाएं। इससे कानून के समान अनुपालन और निष्पक्ष प्रशासन का संदेश जाएगा।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
पत्र में यह भी मांग की गई है कि यदि संबंधित निर्माण वास्तव में कई वर्षों से अवैध थे, तो यह भी जांच की जाए कि अब तक संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की। जहां प्रशासनिक लापरवाही या उत्तरदायित्व बनता हो, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
पिछले दस वर्षों की कार्रवाई सार्वजनिक करने का सुझाव
आज़ाद अधिकार सेना ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रामपुर विकास प्राधिकरण से पिछले दस वर्षों में किए गए प्रमुख ध्वस्तीकरण और नियमितीकरण मामलों का संक्षिप्त विवरण सार्वजनिक करने का भी सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होगा कि वर्तमान कार्रवाई समान और निष्पक्ष प्रवर्तन नीति का हिस्सा है।
पत्र की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव तथा आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। संगठन ने उनसे आग्रह किया है कि यदि जौहर विश्वविद्यालय पर यह मानदंड लागू किए जा रहे हैं, तो प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं बड़े संस्थानों के निर्माणों की भी समान मानकों के आधार पर चरणबद्ध जांच और प्रवर्तन नीति घोषित की जाए@शांतनु/INN
