मुरादाबाद। आयुक्त सभागार, में मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राजस्व वादों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला (वर्कशॉप) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुरादाबाद मंडल के जनपद मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा एवं सम्भल के समस्त अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार सहित राजस्व न्यायालयों से संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित हुए। इन जनपदों के शासकीय अधिवक्ता, नायब तहसीलदार, पेशकार, कानूनगो तथा नामित अधिवक्ताओं ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का शुभारंभ मंडलायुक्त द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने राजस्व वादों के निस्तारण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक वाद का विधिसम्मत, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पक्षों को समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आदेश पारित किए जाएं।
मंडलायुक्त ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि धारा-5 मियाद अधिनियम से संबंधित वादों में भी विधिक प्रक्रिया का पूर्णतः पालन किया जाए तथा प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराते हुए गुणवत्तापूर्ण निर्णय दिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर अनावश्यक रूप से वादों को खारिज करने की प्रवृत्ति से बचा जाए तथा न्यायोचित एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाई जाए।

उन्होंने सभी अवर न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे न्यायालयी पत्रावलियों का नियमित एवं गहन परीक्षण करें, आदेश स्वयं लिखें तथा अभिलेखों के समुचित रखरखाव पर विशेष ध्यान दें, जिससे राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बन सके।
कार्यशाला में विशेष अतिथि एवं प्रशिक्षक के रूप में जे.पी. गुप्ता (सेवानिवृत्त पीठासीन अधिकारी), सर्वेश गुप्ता (सेवानिवृत्त अपर आयुक्त), अरुण कुमार सिंह (अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, गौतमबुद्ध नगर) तथा शरद कुमार (अपर जिलाधिकारी न्यायिक, बिजनौर) ने प्रतिभागियों को विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रथम सत्र में राजस्व न्यायालयों में होने वाली सामान्य त्रुटियों, उनके निराकरण एवं न्यायिक प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

द्वितीय सत्र में नॉन जेड ए एवं नजूल तथा राजस्व संहिता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या की गई तथा राजस्व न्यायालयों में वादों के शीघ्र एवं प्रभावी निस्तारण के लिए अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया गया तथा अपेक्षा की गई कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए राजस्व वादों के निस्तारण में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित की जाए@शांतनु/INN
