अमरोहा,22 अगस्त। लोकप्रिय जासूसी उपन्यासकार स्व. वेदप्रकाश शर्मा की कर्मभूमि एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठे गंभीर सवालों के घेरे में है। मेरठ का डॉ दिग्विजय भाटी से जुड़ा हालिया प्रसंग साहित्यिक संदर्भ में भी असहज सवाल खड़े करता है।
मेरठ से जुड़े स्व. वेदप्रकाश शर्मा ने 1993 में प्रकाशित ‘वर्दीवाला गुंडा’ के जरिए पुलिस तंत्र के दुरुपयोग और अपराध के बीच की खतरनाक रेखा को लोकप्रिय कथानक का विषय बनाया था। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार उपन्यास के पहले संस्करण की क़रीब 15 लाख प्रतियां छपने और इसके अभूतपूर्व लोकप्रिय होने का उल्लेख मिलता है । बाद के वर्षों में इसकी बिक्री के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए। आज़ उसी चर्चित उपन्यास ‘वर्दीवाला गुंडा’ का संदर्भ देने वाले शहर मेरठ में पुलिस की कथित बर्बरता सामने आना प्रतिकात्मक महत्व रखता है।
अमरोहा जिले को कर्मभूमि बनाकर किसानों के हक की आवाज उठाने वाले भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी के साथ मेरठ के एसएसपी कार्यालय में कथित मारपीट और हिरासत में थर्ड डिग्री प्रताड़ना के मामले ने पुलिसिया जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया गया है, जिसके बाद अब प्रशासनिक तबादले से आगे बढ़कर कानूनी व आपराधिक कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
अमरोहा में मुकदमों के दौर से लेकर मेरठ में कथित पुलिसिया हिंसा तक डा. दिग्विजय भाटी के संघर्षों का केंद्र मुख्यतः अमरोहा जिला रहा है, जहां पूर्व में अमरोहा पुलिस द्वारा उन पर एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज किए गए थे और इसी आधार पर उन्हें जिला बदर की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा था।
हाल ही में मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड में निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए मेरठ जिलाधिकारी कार्यालय पर आयोजित प्रदर्शन में नामजद होने के बाद, अदालत से जमानत मिलने पर कथित तौर पर 19 अगस्त को डॉ. भाटी अपने साथी मोहित जाटव के साथ पक्ष रखने तत्कालीन एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान हुए विवाद के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई, जिससे भाटी की आंख में गंभीर चोट आई। आरोप है कि बाद हिरासत दौरान प्रताड़ित भी किया गया।

हालांकि पुलिस पक्ष का दावा है कि चोट स्कूटी से गिरने के कारण आई है, लेकिन पीड़ित पक्ष ने इसे पुलिस अभिरक्षा में हुई हिंसा का नतीजा बताया है।
इसी दौरान शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए अविनाश पांडेय के स्थान पर बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया एसएसपी नियुक्त किया गया है, वहीं एडीजी मेरठ जोन ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच डीआईजी सहारनपुर को सौंपी है। नए एसएसपी ने अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। मामले में अमरोहा पुलिस के आदमपुर का 2019 के चर्चित ऑनर किलिंग प्रकरण को नजीर के रूप में देखा जा रहा है, जहां पुलिस की गलत जांच के चलते निर्दोष परिजनों को जेल जाना पड़ा था और बाद में लड़की के जीवित मिलने पर 11 पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
मेरठ मामले में भी अखिल भारतीय गुर्जर महासभा, विभिन्न किसान संगठनों और खतौली विधायक वरिष्ठ नेता मदन भैया सहित कई सामाजिक-राजनीतिक नेताओं ने निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी व दंडात्मक कार्रवाई और आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है। डॉ दिग्विजय भाटी प्रकरण में शनिवार को जिलाधिकारी अमरोहा को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया है।
तमाम विरोध प्रदर्शनों के बीच 24 अगस्त को सहारनपुर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विभिन्न सामाजिक संगठनों की महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें आगे की आंदोलनकारी रणनीति तय होगी। अमरोहा के जागरूक नागरिकों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की ताकत भय पैदा करने के लिए नहीं बल्कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए होती है। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि मेडिकल साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और डीआईजी जांच के बाद खाकी की जवाबदेही केवल तबादले तक सीमित रहती है या निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की नजीर पेश करती है जिससे पुलिस के प्रति टूटते आमजन के भरोसे को कायम रखा जा सके@शांतनु/INN
