अमरोहा,27 अगस्त। हरियाणा की सीमा से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में बुधवार शाम हरियाणवी गायक अंकित बालियान की जिम से बाहर निकलते समय अंधाधुंध गोलियों से भूनकर हत्या के बाद एक बार फिर इस पूरे क्षेत्र में बढ़ते गन कल्चर, सोशल मीडिया पर अपराध के महिमामंडन और युवा मानस पर पड़ रहे इसके घातक प्रभावों को उजागर कर दिया है।
यह वारदात केवल एक सनसनीखेज हत्याकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि उस बदलते सामाजिक परिवेश की ओर इशारा करती है जहां संगीत और सोशल मीडिया के जरिए बंदूक, गैंग, बदमाशी और दबंगई को युवाओं के बीच स्टाइल और सफलता के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है। मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली के गांव बंतीखेड़ा निवासी और वर्तमान में सोनीपत में रह रहे 35 वर्षीय अंकित बालियान की बुधवार शाम करीब पौने सात बजे हमलावरों द्वारा उन पर 20 से अधिक राउंड गोलियां बरसा कर हत्या कर दी गई।पुलिस फिलहाल हत्यारों का पता लगाने में जुटी हुई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच भौगोलिक सीमा बनाने वाली यमुना के दोनों ओर गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं, जिससे इस वारदात का असर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महसूस किया जा रहा है। समाजशास्त्री डॉ. बीएस जिंदल के अनुसार, इस घटना को केवल कानून-व्यवस्था की प्रशासनिक विफलता मानना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस सामाजिक वातावरण की समीक्षा जरूरी है जहां युवा पीढ़ी के सामने हिंसा और हथियारों को आकर्षक बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। एक समय था जब ‘चन्द्रावल’ जैसी फिल्मों के माध्यम से हरियाणवी सिनेमा लोक संस्कृति, गांव और सामाजिक रिश्तों को केंद्र में रखता था, लेकिन आज व्यावसायिकता के दौर में हथियारों और बदमाशी से जुड़ा कंटेंट तेजी से बढ़ा है।
अंकित बालियान के चर्चित गीत ‘भरी कोर्ट में गोली मारेंगे’ का संदर्भ भी इस विमर्श में सामने आ रहा है। हालांकि किसी कलात्मक प्रस्तुति को सीधे अपराध का कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन कम उम्र के बच्चों पर हथियारों को नायकत्व के रूप में दिखाए जाने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पंजाब में सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद जिस तरह संगीत उद्योग, ड्रग्स सिंडिकेट, गैंगस्टर नेटवर्क और संगठित अपराध के रिश्तों पर चर्चा शुरू हुई थी, उसी तर्ज पर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इस खतरे को देखने की जरूरत है। आजकल वाहनों पर एके-47 के स्टिकर, बॉडी टैटू और यहां तक कि शहीद भगत सिंह की तस्वीरों के साथ आधुनिक हथियारों का चित्रण इस बात का संकेत है कि हथियारों के प्रति समाज में स्वीकार्यता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसिंग का दायरा केवल अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि धमकी की सूचना, आपराधिक नेटवर्क, हथियारों की उपलब्धता, ड्रग्स सिंडिकेट और सोशल मीडिया पर अपराध के प्रचार की कड़ियों को तोड़ना बेहद जरूरी है। युवाओं को हिंसा के आकर्षण से बचाकर शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक सामाजिक मूल्यों की ओर ले जाने के लिए परिवार, स्कूल, प्रशासन और कलाकारों को मिलकर जिम्मेदारी उठानी होगी@MP/INN
