उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया था और सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत इसे अवैध घोषित कर चुकी थी। आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की ओर से दाखिल अपील भी खारिज हो चुकी है।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी और आरआरएफ के जवानों को तैनात किया गया। संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में पुलिस ने गश्त और फ्लैग मार्च भी किया।
प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद को लेकर कानूनी प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी थी। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की गई। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करते हुए सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
इकरा हसन को घर से निकलने से रोका गया
मस्जिद पर कार्रवाई के बीच कैराना सांसद इकरा हसन को भी उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। बताया जा रहा है कि वह सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं, तभी पुलिस उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।
इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और स्थानीय लोगों से जुड़े इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं। सांसद ने सवाल उठाया कि किसी जनप्रतिनिधि को जनता से जुड़े मामले में अधिकारियों से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप कैसे हो सकता है।
2025 में शुरू हुआ था कानूनी विवाद
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई थी।
इसके बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को अवैध ठहराते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। इस आदेश को मस्जिद पक्ष ने चुनौती दी और 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की। हालांकि, बाद में यह अपील भी खारिज हो गई और प्रशासन ने शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।
