मुरादाबाद। बच्चों की छोटी-छोटी भाषा संबंधी गलतियों को सीखने का अवसर बनाने की अभिनव पहल प्राथमिक विद्यालय रसूलपुर नगली में शुरू की गई है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देशों के अनुरूप विद्यालय में ‘मेरी त्रुटियां, मेरी सीख’ कार्यपुस्तिका लागू की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों में अपनी गलतियों को स्वयं पहचानने, उनका विश्लेषण करने और सही रूप सीखकर उनमें सुधार करने की आदत विकसित करना है।

इस कार्यपुस्तिका के माध्यम से बच्चे भाषा शिक्षण के दौरान होने वाली वर्तनी एवं लेखन संबंधी त्रुटियों को स्वयं चिन्हित करके पाठ्यपुस्तक से उनका मिलान करते हुए अशुद्ध शब्द के सामने उसका शुद्ध रूप लिख रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में बच्चा स्वयं अपनी गलती खोजता है, उसका सही रूप समझता है और दोबारा उसका अभ्यास करता है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. हरनन्दन प्रसाद ने बताया कि इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें बच्चों को केवल उनकी गलतियां बताई नहीं जातीं, बल्कि उन्हें अपनी गलती पहचानने और स्वयं उसे सुधारने का अवसर दिया जाता है। इससे बच्चों में आत्ममूल्यांकन और आत्मसुधार की भावना विकसित होती है तथा सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।
उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा अपनी लिखी हुई सामग्री को स्वयं पढ़कर त्रुटि पहचानता है और फिर उसका शुद्ध रूप लिखता है, तो वह केवल एक शब्द को सही करना नहीं सीखता, बल्कि सही भाषा के प्रयोग की प्रक्रिया को समझता है। नियमित अभ्यास से बच्चों की शब्दावली, वर्तनी, लेखन कौशल और व्याकरण संबंधी समझ को मजबूत किया जा रहा है।

‘मेरी त्रुटियां, मेरी सीख’ बच्चों को यह संदेश दे रही है कि गलती सीखने की राह में रुकावट नहीं, बल्कि सुधार और आगे बढ़ने का अवसर है। इस नवाचार के माध्यम से बच्चों में शुद्ध लेखन के साथ-साथ सीखने के प्रति आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है@शांतनु/INN
