मुरादाबाद। मुरादाबाद कचहरी में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जिला चकबंदी अधिकारी (डीडीसी) कार्यालय में तैनात पेशकार सुभाष को कथित रूप से ₹50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर एंटी करप्शन टीम से धक्कामुक्की की और मौके से भागकर कचहरी परिसर में घुस गया। टीम ने पीछा कर उसे कचहरी के अंदर से दोबारा दबोच लिया।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ओमवीर सिंह के अनुसार, उनके जमीन से जुड़े प्रकरण में आदेश पर साइन कराने के नाम पर कथित तौर पर ₹5 लाख की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में कथित रूप से ₹1 लाख में सौदा तय हुआ और इसी रकम की पहली किस्त के रूप में ₹50 हजार देने की बात सामने आई।
आदेश पर साइन के लिए महीनों से कथित दबाव

ठाकुर ओमवीर सिंह का आरोप है कि उनके जमीन संबंधी प्रकरण में आदेश पारित होने के बावजूद कई महीनों तक उस पर साइन नहीं किए जा रहे थे। उनका दावा है कि इसकी वजह रिश्वत की मांग थी। ओमवीर सिंह के मुताबिक, उनसे कथित तौर पर कहा गया कि आदेश पर साइन कराने के लिए रकम देनी होगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिला चकबंदी अधिकारी ने स्वयं उनसे आदेश पर साइन करने के लिए रिश्वत की मांग की और इसके लिए अपने पेशकार सुभाष से संपर्क करने को कहा। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो, मुरादाबाद में की।
लेखपाल से लेकर पेशकार और अधिकारी तक पर गंभीर आरोप
ठाकुर ओमवीर सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिला चकबंदी अधिकारी, संबंधित लेखपाल और पेशकार सुभाष—तीनों कथित तौर पर आपस में मिले हुए हैं और जमीन संबंधी मामलों में रिश्वतखोरी का खेल चल रहा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी बाकी है।
शिकायत के बाद एंटी करप्शन ने बिछाया जाल
ओमवीर सिंह के मुताबिक, लगातार रिश्वत की मांग से परेशान होकर उन्होंने पूरे मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो मुरादाबाद में की। शिकायत के बाद टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की योजना बनाई।
सोमवार को तय योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता ने पेशकार सुभाष को ₹50 हजार की रकम दी। जैसे ही कथित रूप से रिश्वत की रकम स्वीकार की गई, पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने पेशकार को उसकी सीट पर ही दबोच लिया।
टीम से धक्कामुक्की, कचहरी में दौड़ता रहा आरोपी
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी पेशकार ने कथित तौर पर टीम के सदस्यों से धक्कामुक्की की और खुद को छुड़ाकर भागने का प्रयास किया। वह कचहरी परिसर के भीतर भाग गया, लेकिन एंटी करप्शन टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।
अचानक हुई इस कार्रवाई से डीडीसी कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में रिश्वत लेते पेशकार की गिरफ्तारी की खबर पूरे कचहरी परिसर में फैल गई और बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कर्मचारी तथा वादकारी मौके पर पहुंच गए।
अब जांच के घेरे में पूरा प्रकरण
पेशकार की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। एंटी करप्शन ब्यूरो यह पता लगाने में जुटा है कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर की गई थी, ₹1 लाख में कथित सौदा कैसे तय हुआ और इसमें पेशकार के अलावा किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।
ठाकुर ओमवीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई ने मुरादाबाद कचहरी में कथित रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले को उजागर कर दिया है@शान्तनु/INN
