कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग पर कहा कि इसके लिए बाकायदा आवेदन दाखिल किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत में सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार होता है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी की ओर से मजिस्ट्रेट के संज्ञान के खिलाफ दाखिल याचिका करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी किसी विशेष श्रेणी के व्यक्ति नहीं हैं और मामले का लंबे समय तक लंबित रहना संस्था के लिए भी उचित नहीं है।
इस पर CJI सूर्य कांत ने कहा कि अदालत अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। उन्होंने शिकायतकर्ता के वकील से जल्द सुनवाई के लिए उचित आवेदन दाखिल करने को कहा और भरोसा दिलाया कि आवेदन पर सुनवाई की जाएगी।
चीन से जुड़े बयान पर दर्ज हुआ था केस
यह मानहानि मामला राहुल गांधी के दिसंबर 2022 में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर तनाव का जिक्र करते हुए भारतीय सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों की झड़प को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
इसी बयान को लेकर पूर्व BRO अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से वकील विवेक तिवारी के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में राहुल गांधी के बयान को भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया था।
मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने का आदेश दिया था। राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट में पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दूसरी पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई थी। अदालत ने उनके बयान के आधार और संसद के बजाय सोशल मीडिया के जरिए ऐसे मुद्दे उठाने को लेकर भी सवाल किए थे।
अब बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को जल्द सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। यानी फिलहाल अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई की तारीख तय नहीं की है, बल्कि इसके लिए अलग से आवेदन दाखिल करने को कहा है।
