मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित नई तहसील के पास वासुदेव कॉम्प्लेक्स में संचालित स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान को लेकर शिक्षा विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की जांच के बाद संस्थान को वर्तमान पते(वासुदेव कॉम्प्लेक्स) पर तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
आधिकारिक पत्र के मुताबिक, शिकायत के सात बिंदुओं की जांच के दौरान क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने स्वयं वासुदेव कॉम्प्लेक्स स्थित स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच में सामने आया कि संस्थान का पंजीकरण जिस पते पर है, उससे अलग पते(वासुदेव कॉम्प्लेक्स) पर कोचिंग संचालित की जा रही थी। इसके बाद वर्तमान पते पर चल रहे संस्थान को बंद करने के निर्देश जारी किए गए।
जिस परिसर पर पहले लगी थी सील, वहीं कैसे चल रहा था कोचिंग का खेल?
मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि वासुदेव कॉम्प्लेक्स को प्राधिकरण द्वारा करीब दो महीने पहले सील किए जाने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही यह परिसर दोबारा खोला गया और इसके बाद इसी परिसर में स्कॉलर्स डेन का संचालन शुरू मिला।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस परिसर को प्राधिकरण की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, वहां शिक्षा विभाग की आवश्यक अनुमति/NOC के बिना कोचिंग संस्थान का संचालन आखिर किस आधार पर किया जा रहा था?
इतना ही नहीं, वासुदेव कॉम्प्लेक्स को कथित रूप से संदिग्ध कंपाउंडिंग प्रक्रिया के बाद खोले जाने का मामला भी हाई कोर्ट तक पहुंचने की खबर है। ऐसे में इसी परिसर में स्कॉलर्स डेन के संचालन ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।
अब प्राधिकरण के साथ शिक्षा विभाग भी सवालों के घेरे में
स्कॉलर्स डेन के संचालन को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ संस्थान तक सीमित नहीं हैं। यदि वासुदेव कॉम्प्लेक्स में संस्थान बिना आवश्यक शिक्षा विभागीय अनुमति के संचालित हो रहा था, तो यह सवाल भी उठने स्वाभाविक है कि जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? :
- क्या संस्थान को संचालन की अनुमति थी?
- क्या भवन और कोचिंग के संचालन की जांच की गई थी?
अगर नहीं, तो इतने समय तक संस्थान कैसे चलता रहा?
- शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की भी हो जांच
इन सवालों के जवाब अब जांच में तलाशे जाने की जरूरत है।
डमी एडमिशन और स्कूलों की हाजिरी का भी खुलेगा राज?
मामले में सबसे गंभीर आरोप छात्रों के कथित डमी एडमिशन और स्कूलों में उनकी उपस्थिति को लेकर हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न स्कूलों में छात्रों का प्रवेश दिखाकर उन्हें स्कूल समय में स्कॉलर्स डेन में पढ़ाया जाता है और स्कूलों में उनकी उपस्थिति दर्ज होती रहती है।
इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई छात्र-छात्राओं की सूची संबंधित विद्यालयों को भेजकर उनकी वास्तविक उपस्थिति की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यानी अब यह भी जांच होगी कि स्कॉलर्स डेन में पढ़ने वाले छात्र वास्तव में अपने-अपने स्कूलों में नियमित रूप से उपस्थित थे या नहीं।
संचालक की भूमिका पर भी उठे सवाल
संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर के खिलाफ भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है, लेकिन शिक्षा विभाग के आधिकारिक पत्र में छात्रों की स्कूल उपस्थिति की जांच कराने के निर्देश दिए जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
अब सवाल सिर्फ स्कॉलर्स डेन को बंद करने तक सीमित नहीं है। वासुदेव कॉम्प्लेक्स में संस्थान के संचालन की अनुमति किसने दी, भवन दोबारा कैसे खुला, शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी कब हुई और छात्रों के स्कूल रिकॉर्ड में क्या सामने आता है—इन सभी सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे।
दस्तावेज़ ने खोली कार्रवाई की राह
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पत्र में वर्तमान पते पर संचालित कोचिंग संस्थान को बंद करने तथा संबंधित विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति की जांच कराने की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दर्ज है। अब जिला विद्यालय निरीक्षक की जांच के बाद ही इस पूरे प्रकरण की तस्वीर और साफ होगी।
स्कॉलर्स डेन प्रकरण ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं, कोचिंग संस्थान के पते से लेकर भवन की वैधता, शिक्षा विभागीय अनुमति, डमी एडमिशन और छात्रों की कथित फर्जी उपस्थिति तक। अब देखना होगा कि जांच की आंच सिर्फ संस्थान तक पहुंचती है या फिर जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है@शांतनु/INN
