मुरादाबाद। जनपद में कोचिंग संस्थानों को अग्निशमन विभाग द्वारा जारी की गई फायर एनओसी अब शासन स्तर की जांच के घेरे में आ गई हैं। एक अधिवक्ता द्वारा शासन में की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुरादाबाद में कई कोचिंग संस्थानों को निर्धारित अग्निशमन सुरक्षा मानक पूरे किए बिना ही एनओसी जारी कर दी गईं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासन ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतिदिन मौजूद रहते हैं। ऐसे में अग्निशमन सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि एनओसी जारी करने से पहले अग्निशमन विभाग द्वारा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का किस स्तर तक परीक्षण किया गया।
बिना मानक पूरे किए एनओसी जारी करने का आरोप
अधिवक्ता की शिकायत का मुख्य बिंदु यह है कि जिन भवनों में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, उनमें अग्निशमन सुरक्षा से संबंधित निर्धारित मानकों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर एनओसी जारी किए जाने की आशंका है। ऐसे में शासन स्तर की जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों का मौके पर निरीक्षण कब किया गया, निरीक्षण के दौरान क्या कमियां सामने आईं और एनओसी जारी करने से पहले उन कमियों को दूर कराया गया था या नहीं।
दो अलग-अलग फायर एनओसी ने भी खड़े किए सवाल
मामले में वासुदेव कॉम्प्लेक्स से जुड़े फायर एनओसी प्रकरण को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक ही परिसर को लेकर अलग-अलग तारीखों में दो फायर एनओसी जारी की गईं।
बताया गया है कि 5 अगस्त 2026 की एनओसी में भवन के उपयोग को “Mercantile” दर्शाया गया, जबकि इसके करीब एक सप्ताह बाद 12 अगस्त 2026 को जारी दूसरी एनओसी में उपयोग “Educational” दर्ज किया गया।
दोनों एनओसी ऑनलाइन स्टेटस में FINAL दिखाई गईं। शिकायतकर्ता ने इसी अंतर को लेकर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है कि उपयोग की श्रेणी में बदलाव किस आधार पर किया गया और दूसरी एनओसी जारी करने से पहले भवन के उपयोग तथा संबंधित अनुमतियों की क्या जांच की गई।
भवन के उपयोग और फायर एनओसी के बीच तालमेल की जांच की मांग
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि अग्निशमन विभाग द्वारा एनओसी जारी करते समय संबंधित भवन के स्वीकृत मानचित्र, भू-उपयोग और वास्तविक मौके पर हो रहे इस्तेमाल का मिलान किया गया था या नहीं।
खास तौर पर यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि यदि किसी भवन का वास्तविक उपयोग कोचिंग अथवा शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, तो फायर विभाग के रिकॉर्ड में उस समय किस श्रेणी का उपयोग दर्ज था।
शासन की जांच में तय होगी जिम्मेदारी
अब शासन स्तर की जांच में एनओसी जारी करने की पूरी प्रक्रिया, मौके पर किए गए निरीक्षण, अग्निशमन सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, भवन की संरचना तथा उपयोग की श्रेणी समेत अन्य बिंदुओं की जांच किए जाने की मांग है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भी सामने आ सकता है कि एनओसी जारी करने में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोचिंग संस्थानों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहते हैं। ऐसे में फायर एनओसी महज एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है।
अब शासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि मुरादाबाद में कोचिंग संस्थानों को जारी फायर एनओसी की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या इसमें कहीं गंभीर स्तर पर लापरवाही बरती गई@शांतनु/INN
