तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्हें अपनी अपील पर सुनवाई से पहले सरेंडर करने को कहा गया था।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आत्मसमर्पण से राहत देने की मांग की थी। अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और उसका प्रमाण कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया था।
2013 में महिला पत्रकार ने लगाए थे गंभीर आरोप
यह मामला नवंबर 2013 का है। एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद पुलिस ने 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सरेंडर से छूट चाहते थे तेजपाल
तेजपाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि उनकी आपराधिक अपील पर पहले सुनवाई की जाए और उसके बाद सरेंडर की जरूरत पर फैसला लिया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि कुछ परिस्थितियों में अदालत आरोपी को सरेंडर की अनिवार्यता से राहत दे सकती है।
हालांकि, गोवा सरकार ने इस मांग का विरोध किया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की गंभीरता और हाईकोर्ट की ओर से सुनाई गई 10 साल की सजा का हवाला दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह का दिया था समय
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस चरण में विचार केवल सरेंडर से राहत के मुद्दे पर होगा। तेजपाल की ओर से आत्मसमर्पण के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया था।
इसके बाद अदालत ने छूट की मांग खारिज करते हुए उन्हें निर्धारित समय के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था। साथ ही आत्मसमर्पण का प्रमाण कोर्ट में पेश करने को कहा गया था।
22 सितंबर को हो सकती है अपील पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सरेंडर प्रमाण पत्र जमा होने के बाद तेजपाल की बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया जा सकता है।
अब मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण के बाद उनकी अपील के सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
