नई दिल्ली। मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में हुई मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे राहत शिविरों में हुई मौतों, विशेष रूप से असामान्य परिस्थितियों में हुई मौतों को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सवाल उठाया कि राहत कैंपों में दर्ज 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। कोर्ट ने यह भी जानकारी मांगी कि विस्थापित लोगों की असामान्य मौतों के मामलों में केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा दिए जाने का आधार क्या था।
अदालत ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (MSLSA) को भी अलग से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि असामान्य मौत के सभी मामलों में FIR दर्ज हो और उनकी जांच तेजी से आगे बढ़ाई जाए। साथ ही राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी मांगी गई है।
30 से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आई
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल कमेटी और एक IAS अधिकारी की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। रिपोर्ट में मणिपुर के राहत कैंपों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया था। इनमें एक मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद होने की जानकारी भी सामने आई।
सुनवाई के दौरान CBI और राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि CBI ने 31 मामलों की जांच की है। इनमें से 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है, जबकि तीन मामलों की जांच अभी जारी है।
अदालत ने उम्मीद जताई कि 2023 की हिंसा से जुड़े CBI और NIA मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष ट्रायल कोर्ट इन मामलों की सुनवाई में तेजी लाएंगी।
मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए।
