मुरादाबाद, 19 अक्टूबर। मुरादाबाद के पसियापुरा गांव में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) की महापंचायत में किसानों की आय, फसलों के लाभकारी मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कर्ज से राहत और भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए गए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी की मौजूदगी में किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप लागत के आधार पर एमएसपी तय करने, सरकारी खरीद की कानूनी गारंटी देने तथा बुवाई के सीजन में खाद और प्रमाणित बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। महापंचायत में कृषि संकट के साथ स्थानीय रोजगार, भंडारण, प्रसंस्करण और बिजली से जुड़े मुद्दे भी उठे।

महापंचायत में वक्ताओं ने मांग की कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप सी-2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर निर्धारित किया जाए और इस मूल्य पर खरीद की कानूनी गारंटी मिले। उनका कहना था कि कई बार किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है, जिससे खेती की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होती है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि मौजूदा खरीद व्यवस्था का लाभ सभी किसानों तक समान रूप से नहीं पहुंचता। छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों की आय सुरक्षा के लिए किसान आय एवं कल्याण आयोग गठित करने तथा प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई। एमएसपी की कानूनी गारंटी से जुड़े संभावित वित्तीय बोझ और कृषि सब्सिडी पर जारी बहस का उल्लेख करते हुए किसान नेताओं ने कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सहायता की तुलना अन्य क्षेत्रों को मिलने वाली रियायतों से करने की जरूरत बताई।

किसानों ने कर्ज वसूली के मामलों में कुर्की और नीलामी जैसी सख्त कार्रवाई से राहत देने तथा कृषि संकट को देखते हुए कर्ज पुनर्गठन और राहत की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अनियमित बारिश, सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों में फसल नुकसान का आकलन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और बीमा दावों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मंडियों, सरकारी खरीद केंद्रों और भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया, ताकि किसानों को फसल बेचने और सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त विकल्प मिल सकें।

बुवाई के मौसम में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों ने डीएपी और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा कथित कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को सरकारी निर्धारित दरों पर समय से खाद और प्रमाणित बीज मिलने चाहिए, जिससे उन्हें अतिरिक्त कीमत चुकाने या बुवाई में देरी का सामना न करना पड़े। महापंचायत में कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट की बढ़ती भूमिका, एथेनॉल नीति तथा खाद-बीज से जुड़ी नीतियों की समीक्षा की मांग भी उठाई गई।

स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर किसानों ने एग्री क्लस्टर विकसित करने, आलू उत्पादक क्षेत्रों में भंडारण गृह और प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने तथा गन्ना विकास संस्थान और डेयरी बोर्ड बनाने की मांग की। युवाओं के रोजगार और कौशल विकास के लिए प्रत्येक जिले में सेना भर्ती प्रशिक्षण केंद्र खोलने, निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को 90 प्रतिशत भागीदारी देने और मंडल स्तर पर संस्कृति केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। किसानों के लिए मुफ्त बिजली और घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग भी महापंचायत में उठाई गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी की मौजूदगी में हाईवे निर्माण तथा औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन के मुआवजे का मुद्दा भी उठा। किसानों ने भूमि के सर्किल रेट के आधार पर उचित मुआवजा निर्धारित करने और अधिग्रहीत जमीन के साथ फसलों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने की मांग की।

महापंचायत में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यभान शांडिल्य, प्रदेश प्रवक्ता जे.के. चौधरी, जिलाध्यक्ष रोहित देवल,मुकर्रम चौधरी, अरुण ठाकुर, विवेक चौधरी, धर्मेंद्र चौधरी, सुनील चौधरी, हसन चौधरी, राहुफ चौधरी, नजरुल चौधरी, याकूब, समीर चौधरी और जमीर अहमद सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे@ब्यूरो/INN
