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अमरोहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में राजकीय मेला और 2019 में तिगरी और गढ़ मेले को जोड़ने के लिए गंगा पर पुल बनाने की घोषणा की थी। लेकिन नौकरशाही के चलते पुल निर्माण अधर में लटका है। राजकीय मेला घोषित होने के बाद मेला प्रबंधन जिला प्रशासन द्वारा संचालित किया जाने लगा । लेकिन मेले की दुश्वारियां आज़ भी जस-की-तस बनी हुई हैं।
पिछले 25 वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले की कवरेज करते चले आ रहे वरिष्ठ मान्यता प्राप्त पत्रकार महिपाल सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते डिजिटल युग में मेले में इंटरनेट बाधित रहने से जहां डिजिटल भुगतान नहीं हो सकेगा तथा डायल 112 सेवा भी बुरी तरह प्रभावित होती है। श्री सिंह ने सुझाव देते हुए कहा कि मेला प्रबंधन को जिओ /एयरटेल जैसे प्रदाताओं के साथ साझेदारी कर अस्थाई 5जी हाटस्पाट लगाने चाहिए।एप के माध्यम से वर्चुअल दर्शन और लाइव स्ट्रीमिंग संभव है।यह मेला सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन आधुनिक प्रबंधन से इसे विश्वस्तरीय बनाया जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के जिला अध्यक्ष महिपाल सिंह ने मेले के संदर्भ में बताया कि मीडिया सेंटर स्थापना और पत्रकारों/फोटोग्राफरों के ठहरने, भोजन आदि सुविधाओं के लिए व्यावहारिक सुझाव है। ये सुझाव अन्य राजकीय मेलों (जैसे महाकुंभ 2025 में मीडिया सेंटर की स्थापना) और सामान्य आयोजन प्रबंधन मानकों पर आधारित हैं। इन्हें लागू करने से मीडिया कवरेज सुगम होगा, जिससे मेले की व्यापक पहुंच बढ़ेगी।
मीडिया सेंटर की स्थापना, स्थान और संरचना हेतु मेला क्षेत्र के केंद्रीय भाग में (जैसे गंगा घाट के निकट) एक अस्थायी मीडिया सेंटर (200-300 वर्ग मीटर) स्थापित करें। इसमें वर्कस्टेशन (डेस्क, कुर्सियां), वाई-फाई हॉटस्पॉट (उच्च गति इंटरनेट के साथ), चार्जिंग पॉइंट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस रूम शामिल हों। महाकुंभ 2025 की तर्ज पर इसे डिजिटल रूप से सुसज्जित रखें, जहां लाइव स्ट्रीमिंग और ड्रोन कवरेज के लिए अलग जोन हो।
प्रेस रिलीज डिस्प्ले बोर्ड या डिजिटल स्क्रीन।
मेला मैप, कार्यक्रम शेड्यूल और अपडेट के लिए ऐप-आधारित पोर्टल। सीसीटीवी कनेक्शन और 24×7 स्टाफ तैनाती।
लागत अनुमान: 10-15 लाख रुपये (टेंट, इक्विपमेंट सहित)। स्थानीय आईटी फर्म से टेंडर जारी करें। मेला समिति द्वारा 15-20 दिनों पहले सेंटर का उद्घाटन करें, ताकि पत्रकारों को परिचय मिले।
ठहरने की सुविधाएं
पंचायत/सरकारी गेस्ट हाउस: तिगरी गांव या निकटतम अमरोहा/हापुड़ में सरकारी गेस्ट हाउस या पंचायत भवनों को 50-100 पत्रकारों/फोटोग्राफरों के लिए आरक्षित रखें। प्रत्येक कमरे में एयर कंडीशनिंग, बेडिंग और वाई-फाई सुनिश्चित करें।
मेला परिसर में अस्थायी टेंट विलेज स्थापित करें, जैसा कि कुम्भ मेले में किया जाता है। प्रत्येक टेंट में 2-4 बेड, लॉकर्स और बाथरूम हों। अमरोहा रेलवे स्टेशन से मेला स्थल तक शटल बसें चलाएं। ई-रिक्शा स्टैंड की व्यवस्था करें।
पूर्व-पंजीकरण पत्रकार कार्ड के आधार पर अनिवार्य करें। महिलाओं पत्रकारों के लिए अलग जोन रखें। 100 पत्रकारों के लिए अलग से मेला बजट होना चाहिए।
भोजन की सुविधाएं
मीडिया कैंटीन: सेंटर के निकट एक समर्पित कैंटीन लगाएं, जहां शाकाहारी भोजन (नाश्ता, दोपहर/रात्रि भोजन) उपलब्ध हो। दैनिक तीन समय का भोजन (उदाहरण: नाश्ता – पोहा/इडली; भोजन – दाल-रोटी-सब्जी) प्रदान करें।
पानी और स्नैक्स
बोतलबंद पानी, फल और हल्के स्नैक्स (बिस्किट, जूस) मुफ्त वितरित करें। हाइड्रेशन स्टेशन (पानी कूलर) हर 50 मीटर पर लगाएं।
स्वास्थ्य फोकस
शुद्ध, हाइजीनिक भोजन सुनिश्चित करें। एलर्जी वाले विकल्प (जैसे ग्लूटेन-फ्री) रखें। स्थानीय एनजीओ या कैटरर्स से टाई-अप करें। फीडबैक फॉर्म से गुणवत्ता जांचें।
अन्य सहायक सुविधाएं
फोटोग्राफरों के लिए, डेडिकेटेड फोटो जोन (ट्राइपॉड स्टैंड, बैटरी बैकअप) और डिजिटल स्टोरेज लॉकर। ड्रोन उड़ान अनुमति के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त करें। मेडिकल कैंप (डॉक्टर, एम्बुलेंस) मीडिया सेंटर से जुड़ा हो। मास्क, सैनिटाइजर अनिवार्य।
परिवहन और संचार
मेला ऐप विकसित करें, जिसमें रीयल-टाइम अपडेट, हेल्पलाइन और मैप हो। पत्रकारों को आईडी कार्ड जारी करें, जो सभी सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करे। क्षेत्रीय भाषा (हिंदी/उर्दू) में साइनेज और स्टाफ तैनात करें। दिव्यांग पत्रकारों के लिए रैंप और विशेष सहायता। मेला समिति में एक मीडिया कोऑर्डिनेटर नियुक्त करें, जो दैनिक फीडबैक ले।जिला प्रशासन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और स्थानीय जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन के साथ मिलकर योजना बनाएं। बजट में 10-15% मीडिया सुविधाओं के लिए अलग रखें।
लाभ
बेहतर सुविधाओं से मीडिया कवरेज बढ़ेगा, जिससे मेला राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। महाकुंभ 2025 में सीएम योगी द्वारा उद्घाटित मीडिया सेंटर की तर्ज पर यहां भी डिजिटल महाकुंभ जैसी पहल अपनाएं।
यदि आपको इन सुझावों पर विस्तृत योजना, बजट ब्रेकडाउन या कोई संशोधन चाहिए, तो अधिक जानकारी प्रदान करें।
