केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा राज्यों तक पहुंच गया है। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने झारखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर केंद्र में जवाबदेही तय हुई है, तो राज्यों में भी समान मानक अपनाए जाने चाहिए।
सोमवार को लखनऊ में विश्वविद्यालय के छात्रों ने बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया। छात्रों का कहना है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों में केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि संबंधित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं।
पंजाब में दो भर्ती परीक्षाओं पर सियासी घमासान
पंजाब में फार्मेसी अफसर भर्ती और कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद गहरा गया है। विपक्ष का आरोप है कि भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और सरकार पूरे मामले को छिपाने की कोशिश कर रही है।
फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस और स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने कई परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर 35 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 28 अभ्यर्थी शामिल थे। जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थी ब्लूटूथ डिवाइस और पेन कैमरे की मदद से परीक्षा के दौरान सवाल बाहर भेज रहे थे। पुलिस के मुताबिक यह रियल-टाइम हाई-टेक नकल का मामला था, जबकि विपक्ष इसे सीधे पेपर लीक और प्रशासनिक विफलता बता रहा है।
वहीं कृषि विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में भी विपक्ष ने प्रश्नपत्र लीक और ग्रेस मार्क्स के जरिए मामले को दबाने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आंध्र प्रदेश में मेगा DSC भर्ती पर विवाद
आंध्र प्रदेश में मेगा DSC-2025 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की है।
पार्टी नेताओं का दावा है कि परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र तैयार करने और गोपनीय प्रक्रिया में गंभीर खामियां रहीं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। वाईएसआरसीपी ने पूरे मामले की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग करते हुए राज्यपाल को दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी सौंपने का दावा किया है।
तेलंगाना में भी शिक्षा विभाग पर सवाल
तेलंगाना में बीजेपी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को शिक्षा विभाग संभालने पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि छात्रों की ट्यूशन फीस री-इंबर्समेंट योजना का हजारों करोड़ रुपये का बकाया अब तक जारी नहीं किया गया है। बीजेपी का कहना है कि यदि सरकार छात्रों से जुड़े मामलों का समाधान नहीं कर पा रही है तो शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और छात्र संगठनों के आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
