लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2020 में नियुक्त किए गए 67,867 शिक्षकों की सेवाओं पर कोई खतरा नहीं है। सरकार ने न्यायालय को बताया कि यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप तैयार की जाने वाली नई मेरिट सूची में कुछ नए अभ्यर्थी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की नौकरी समाप्त नहीं की जाएगी।
सरकार ने यह भी कहा कि न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, वह केवल 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती तक सीमित रहेगा। इसे भविष्य में होने वाली अन्य शिक्षक भर्तियों के लिए मिसाल या आधार नहीं माना जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार के अनुसार, 1 दिसंबर 2018 को शासनादेश जारी कर परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दी गई थी। भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 के तहत शुरू हुई।
इसके बाद 6 जनवरी 2019 को ATRE-2019 (Assistant Teacher Recruitment Examination) आयोजित की गई। भर्ती प्रक्रिया के दौरान कटऑफ, आरक्षण और मेरिट सूची को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि नई मेरिट सूची के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को रिक्त पदों पर समायोजित किया जाएगा, जबकि पहले से नियुक्त 67,867 शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित रहेंगी।
यह मामला प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं@शांतनु/INN
