अमरोहा। उत्तरी भारत के महाभारत कालीन गढ़गंगा-तिगरी गंगा मेले की तैयारियों का गुरुवार को उच्चाधिकारियों ने जायजा लिया। डीएम ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था चाक- चौबंद करने और डीआईजी ने सुरक्षा को लेकर अधीनस्थों को आवश्यक निर्देश दिए।


पुलिस उप महानिरीक्षक मुनिराज जी द्वारा आज अन्य अधिकारियों के साथ गंगा तिगरी मेला की तैयारियों को लेकर स्थलीय निरीक्षण किया गया। एक नवंबर एकादशी को कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले का विधिवत शुभारंभ के बाद चार नवंबर को पितरों की याद में दीपदान के अगले दिन यानी पांच नवंबर को मुख्य स्नान के बाद मेले का समापन होगा।डीआईजी मुनिराज जी ने कहा कि भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के दृष्टिगत सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और इसके मद्देनजर फोर्स की संख्या में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि मेले में स्टंटबाजी या खुराफाती कार्य करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


मेला स्थल पर सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जाएगी। यातायात और पार्किंग के लिए जो कार्य योजना बनाई गई है जिससे श्रद्धालुओं के साथ आमजन को भी किसी तरह की समस्या न होने पाए। डीआईजी ने तिगरी गंगा मेला को भव्य, सुरक्षित और आकर्षक बनाने के लिए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं इसलिए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से पूर्ण कर ली जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हों।


डीएम निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि गंगा जल स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वीवीआईपी और प्रशासनिक कैंपस समेत सामान्य रूप से अन्य सेक्टर लगभग तैयार हो चुके हैं।सांस्कृतिक कार्यक्रम, दीपदान स्थल और रंगोली स्थल भी चिन्हित कर लिए गए हैं। सभी सेक्टर में पेयजल आपूर्ति और प्रकाश की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। महिलाओं के लिए शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मेले में आने का आह्वान किया।


इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद, मुख्य विकास अधिकारी अश्विनी कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी श्रीमती गरिमा सिंह,अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदौरिया, अपर जिलाधिकारी न्यायिक धीरेन्द्र प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी श्रीमती विभा श्रीवास्तव,लोक निर्माण विभाग, बाढ़ खंड सहित संबंधित अधिकारी और कार्यदायी संस्था के अधिकारी उपस्थित थे।


ज्ञात हो कि पिछले कई वर्षों से स्वच्छता अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, इसमें बड़ी कामयाबी मिलने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हक़ीक़त इससे अलग है । गढ़ गंगा- तिगरी मेला इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां तैयार किए गए अधोमानक शौचालयों की अस्वच्छ दशा श्रदालुओं के मौलिक और सम्मान के अधिकारों का उल्लघंन है। यह सीधे तौर पर सरकारी मेला प्रबंधन की सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करने के प्रति जिम्मेदारी की नाकामी है। वर्ष 2017 में राजकीय मेला घोषित होने के बाद उम्मीद जगी थी कि स्थिति में सुधार आएगा। परंतु आठ साल बाद भी मेला परिसर में कुछ खास जगहों जैसे वीवीआईपी और प्रशासनिक कैंपस को छोड़कर बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की गंदगी देखकर अधिकांश श्रद्धालु उनका इस्तेमाल ही नहीं करते। यह निराशाजनक है कि खुले में शौच मुक्त वातावरण देने का वादा करने और शौचालय बनाने के दावे तो किए, लेकिन पालीथिन में लिपटे उन शौचालयों की साफ-सफाई के मानक नहीं तय किए गए। जिसके चलते अधिकांश श्रद्धालुओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।


मेला सनातनी होने के बावजूद मेले में महामंडलेश्वर, साधू- संतों, यज्ञ-हवन अन्न क्षेत्र, लंगर भंडारे बरसों से देखने को नहीं मिले और ना ही ऐसे प्रयास किए गए। राजकीय घोषित होने के बाद गढ़ गंगा- तिगरी मेले में मंडल भर के पत्रकारों को मेला प्रशासन द्वारा बुलावा भेजने की औपचारिकता तक नहीं निभाई जाती है। तथा मीडिया सेंटर के नाम पर फटेहाल कुछ टैंट खड़े कर कर्तव्यों की इति श्री समझ ली जाती है। राजकीय मेला घोषित होने के बाद होने वाली मेला समापन गोष्ठी की परंपरा भी लगभग समाप्त कर दी गई है। पूर्व में गोष्ठी में मेले का फीडबैक लेकर, मेले की बेहतरी के लिए सुझावों पर अमल करते हुए अगले वर्ष उसमें सुधार कर तैयारियां की जाती थी। मेला प्रशासन द्वारा मुरादाबाद, संभल तथा रामपुर जनपदों के दुकानदारों और श्रद्धालुओं को मेले में बुलाने की व्यवस्था कर उन्हें अलग-अलग सेक्टरों में बसाया जाना चाहिए।
