मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में बुधवार को मुरादाबाद, मेरठ एवं सहारनपुर मंडल की संयुक्त खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख रहे। कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मंडलीय एवं जनपदीय प्रशासनिक अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

गोष्ठी के दौरान कृषि, पशुपालन, गन्ना, उद्यान, इफको, फसल बीमा एवं जैविक खेती से जुड़े विभिन्न स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई गईं, जिनका अवलोकन राज्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।
राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है। उन्होंने दलहन मिनीकिट वितरण, कृषि यंत्रों एवं बीजों पर अनुदान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल देते हुए अधिकारियों को अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए रवीन्द्र कुमार ने कहा कि किसानों द्वारा उठाई गई समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि गोष्ठियों के नियमित आयोजन, कृषि विविधीकरण, गन्ने के साथ सहफसली खेती, गुणवत्तापूर्ण धान उत्पादन तथा उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि कृषि भूमि लगातार कम हो रही है और किसान खेती की जमीनों को प्लॉटिंग में परिवर्तित कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से मुख्य फसल के साथ सहफसली खेती अपनाने, नेपियर घास लगाने और पशुपालन को आय का अतिरिक्त स्रोत बनाने की अपील की।

जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने किसानों की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि गौ आधारित और जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग फसलों और भूमि की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, जबकि देसी गाय की खाद खेतों के लिए अमृत के समान है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि जनपद में उर्वरक एवं बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती, सहफसली खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन, धान और गन्ने की उन्नत प्रजातियों, सिंचाई प्रबंधन तथा कृषि तकनीकों के बेहतर उपयोग पर किसानों को जानकारी दी। साथ ही श्री अन्न (मोटे अनाज) की खेती और उसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति भी जागरूक किया गया।

इस दौरान विभिन्न जनपदों से आए किसानों ने विद्युत आपूर्ति, आवारा पशुओं की समस्या, नहरों में समय पर पानी उपलब्ध कराने, गन्ना मूल्य बकाया भुगतान, लो-वोल्टेज, खेतों की तारबंदी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे उठाए, जिन पर अधिकारियों ने विस्तार से चर्चा करते हुए समाधान का आश्वासन दिया।
गोष्ठी का मुख्य संदेश रहा कि कृषि में नवाचार, प्राकृतिक खेती, सहफसली खेती और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
