कोर्ट ने लिया गंभीर संज्ञान
लखनऊ। देवरिया में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की शिकायत पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामला पुलिस अभिरक्षा के दौरान अमिताभ ठाकुर के शरीर पर चोटें आने के आरोप से जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में पुलिस अभिरक्षा में किसी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।

एसपी को 10 दिन का समय
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस प्रकरण में एसपी को निर्देश दिए हैं कि वे 10 दिनों के भीतर पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट करने को कहा गया है।
न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने के बाद आदेश
यह आदेश उस समय पारित किया गया जब बीते बुधवार को अमिताभ ठाकुर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। पूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मामले की पारदर्शी जांच पर जोर दिया।

हिरासत में मारपीट का आरोप
अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि औद्योगिक प्लॉट की जांच के दौरान कथित अनियमितताओं के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान पुलिस अभिरक्षा में उनके साथ मारपीट और हाथापाई हुई, जिससे उन्हें चोटें आईं। अदालत में पेशी के दौरान उन्होंने पुलिस प्रताड़ना की बात कही, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड में दर्ज किया।
मेडिकल रिपोर्ट तलब, जांच के निर्देश
अदालत ने अमिताभ ठाकुर के बयान को गंभीरता से लेते हुए उनकी मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई और पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा एसपी को सौंपा है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पुराने मामलों में फंसाने का आरोप
अमिताभ ठाकुर ने अदालत को बताया कि वर्ष 1998 से 2000 के बीच की फाइलों को गलत तरीके से उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें फंसाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन की ओर से अनुचित दबाव बनाया गया।
रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
अदालत ने टिप्पणी की कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
