सोनिया गांधी ने संसद में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नए ‘VB-G RAM-G’ (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) बिल 2025 का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल राजनीतिक द्वेष के कारण ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाकर योजना की पहचान मिटाना चाहती है। सोनिया गांधी ने इसे देश के महान प्रतीकों और गरीबों की उम्मीदों का अपमान बताया।
‘काम के अधिकार’ पर खतरा
सोनिया गांधी ने सरकार पर “बुलडोजर नीति” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह यूपीए सरकार ने 20 साल पहले कानून बनाकर गरीबों को काम की गारंटी दी थी, उसे अब खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए बिल के जरिए ‘राइट टू वर्क’ (काम के अधिकार) को कमजोर कर इसे केवल एक प्रशासनिक मिशन बनाया जा रहा है, जिससे गरीबों का कानूनी हक छिन जाएगा।
बजट में कटौती और मजदूरी का मुद्दा
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख ने बजट आवंटन पर सवाल उठाते हुए कहा कि ₹86,000 करोड़ का मौजूदा बजट जीडीपी के अनुपात में पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। उन्होंने मांग की कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी को तुरंत बढ़ाकर ₹400 प्रतिदिन किया जाना चाहिए और काम के दिनों की गारंटी को 100 से बढ़ाकर 150 दिन करना चाहिए।
तकनीकी बाधाओं का विरोध
सोनिया गांधी ने आधार-आधारित भुगतान (ABPS) और डिजिटल उपस्थिति (NMMS) को गरीबों के खिलाफ एक “हथियार” बताया। उन्होंने तर्क दिया कि ग्रामीण इलाकों में खराब इंटरनेट और तकनीकी पेचीदगियों के कारण दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को उनकी मेहनत की कमाई से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इन “कृत्रिम बाधाओं” को तुरंत हटाने की मांग की।
संसद से सड़क तक आंदोलन की चेतावनी
मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर झुकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार ने मनरेगा की आत्मा पर बुलडोजर चला दिया है, लेकिन हम देश के करोड़ों गरीबों के लिए यह लड़ाई लड़ेंगे।”
