अमरोहा। भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि अमरोहा जनपद के गजरौला क्षेत्र में व्याप्त पर्यावरणीय संकट किसी एक सरकार की विफलता नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही क्रूर उदासीनता और असंवेदनशीलता का भयावह परिणाम है। उन्होंने इसे एक जीता-जागता पर्यावरणीय दुःस्वप्न बताते हुए कहा कि यहां हर सांस मौत को न्योता दे रही है।


विषैले भूजल के खिलाफ दूसरे दिन भी किसानों का धरना जारी
गजरौला ब्लॉक के बसैली गांव में विषैले भूजल और जहरीली हवा के खिलाफ किसानों का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी रही, जिन्होंने प्रशासन से ठोस और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

एसडीएम के निर्देश पर लिए गए पानी व मिट्टी के नमूने
रविवार को उपजिलाधिकारी मंडी धनौरा विभा श्रीवास्तव के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम सहित संबंधित विभागों की टीम धरनास्थल पर पहुंची और पानी व मिट्टी के नमूने एकत्र किए। इस दौरान एसडीएम ने भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी सहित आंदोलनकारी किसानों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं।


जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का आश्वासन
उपजिलाधिकारी ने किसानों को आश्वासन दिया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने किसानों से एक सप्ताह का समय मांगा, जिस पर किसानों ने निगरानी बनाए रखने की बात कही।

रराजनीति होती रही हालात बद से बदतर होते चले गए
किसानों को संबोधित करते हुए नरेश चौधरी ने कहा कि गजरौला में आए दिन बड़े नेताओं का जमावड़ा रहता है, इसके बावजूद जहरीली हवा और विषैला भूजल लगातार लोगों की जान ले रहा है। वर्षों से यह गंभीर मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहा, सत्ता बदलती रही, वादे होते रहे, लेकिन धरातल पर हालात बद से बदतर होते चले गए।

एनजीटी की सख्ती कहां गई? – किसान नेता का सवाल
किसान नेता ने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की अपेक्षित सख्ती आखिर कहां गायब हो गई। उन्होंने कहा कि समस्या अब केवल जमीन या पर्यावरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र में ‘हेल्थ इमरजेंसी’ जैसे हालात बन चुके हैं।

एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों से जांच की मांग
नरेश चौधरी ने मांग की कि हालात की गंभीरता को देखते हुए एम्स दिल्ली के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम को बुलाकर क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण लोगों के फेफड़े कोरोना जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं, खेती विषाक्त हो चुकी है और बच्चे व बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं।

प्रदूषण अब असुविधा नहीं, सीधी मौत का खतरा
उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर एक ही सत्ता होने के बावजूद इस वर्ष प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालात इतने भयावह हैं कि लोग अपने रिश्तेदारों से यह तक सुनने को मजबूर हैं कि यदि संभव हो तो इस जहरीले इलाके को छोड़ दें।

अगर अब भी नहीं जागे जिम्मेदार, तो आने वाली पीढ़ियां होंगी बर्बाद
किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि अब भी जिम्मेदार नहीं जागे, तो यह जहर न केवल वर्तमान पीढ़ी को निगल जाएगा, बल्कि आने वाली नस्लों का भविष्य भी हमेशा के लिए विषैला कर देगा। उन्होंने कहा—“गजरौला चीख रही है, बचाओ हमें… अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।”

धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान नेता रहे मौजूद
इस अवसर पर राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, जगदेब सिंह, जयकरन सैनी, ओम प्रकाश, चौधरी चरण सिंह, अब्दुल रशीद, दिलशाद, जगपाल सिंह मलिक, सुरेश सिंह, नबी चौधरी, मोनित कुमार, सुरेंद्र चौधरी, सुमर सिंह, नहीम चौधरी, इरशाद चौधरी, साइने आलम, लक्की चौधरी, विशाल यादव, हेरी लामा, पुनीत चौधरी, लकी चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
