चर्चित दादरी अखलाक मॉब लिंचिंग केस में 23 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गौतम बुद्ध नगर (सूरजपुर) की फास्ट-ट्रैक अदालत ने राज्य सरकार की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी।
सूरजपुर की जिला अदालत ने यूपी सरकार द्वारा दायर केस वापसी की याचिका को “महत्वहीन और आधारहीन” करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
सरकार के तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
यूपी सरकार ने धारा 321 CrPC के तहत अर्जी दाखिल कर मुकदमा वापस लेने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए थे:
- गवाहों के बयानों में विरोधाभास: सरकार ने दावा किया कि गवाहों के बयानों में समय के साथ बदलाव आया है।
- सामाजिक सौहार्द: तर्क दिया गया कि इलाके में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए केस वापस लेना जरूरी है।
- हथियारों का अभाव: सरकार ने यह भी कहा कि घटना में कोई घातक हथियार (जैसे बंदूक) इस्तेमाल नहीं हुआ था, केवल लाठी-डंडों का प्रयोग हुआ था।
- कोर्ट का रुख: अदालत ने इन दलीलों को संतोषजनक नहीं माना और कहा कि केस वापसी के लिए कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
पीड़ित परिवार का संघर्ष
अखलाक के परिवार, विशेषकर उनकी पत्नी इकरामन, ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया था।
- परिवार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी सरकार के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि लाठियों से हुई हत्या को कम अपराध नहीं माना जा सकता।
- पीड़ित पक्ष के वकीलों ने इसे “न्याय के साथ खिलवाड़” और “अपराधियों को संरक्षण” देने की कोशिश बताया था।
सुनवाई की अगली तारीख और सुरक्षा निर्देश
- अगली सुनवाई: अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 6 जनवरी 2026 की तारीख तय की है।
- गवाहों को सुरक्षा: कोर्ट ने पुलिस प्रशासन (पुलिस आयुक्त और डीसीपी ग्रेटर नोएडा) को निर्देश दिया है कि यदि गवाहों को खतरा महसूस हो, तो उन्हें तुरंत सुरक्षा प्रदान की जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 28 सितंबर 2015 का है, जब ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक की उनके घर में घुसकर भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यह घटना गोमांस रखने और खाने की अफवाह के बाद हुई थी। वर्तमान में इस मामले में 15 से अधिक आरोपी जमानत पर बाहर हैं और उन पर हत्या (धारा 302) सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है।
