मुरादाबाद। पूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बेहद खतरनाक अवैध कारोबार का पर्दाफाश हुआ है, जो किसी भी समय सैकड़ों लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता था। थाना मुंढापांडे क्षेत्र के काशीपुर–अलीगंज मार्ग पर स्थित गांव दलपतपुर में घर के अंदर संचालित फर्जी पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया है।

बिना लाइसेंस और एनओसी के बिक रहा था पेट्रोल-डीजल
जांच में सामने आया कि उक्त स्थान पर बिना किसी वैध लाइसेंस, एनओसी और विस्फोटक विभाग की अनुमति के पेट्रोल-डीजल का भंडारण और खुलेआम बिक्री की जा रही थी। आवासीय क्षेत्र के बीच सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर मशीन लगाई गई थी, जिससे पूरा गांव चलते-फिरते बारूद के ढेर पर बैठा हुआ था।

जरा-सी चिंगारी से हो सकता था बड़ा हादसा
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के अवैध ईंधन भंडारण से मामूली चिंगारी भी भीषण विस्फोट का कारण बन सकती थी। इसके बावजूद महीनों से गांव के बीच यह खतरनाक कारोबार धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा था।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
पेट्रोल पंप एसोसिएशन की शिकायत पर जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) संजीव कुमार के निर्देश पर पूर्ति विभाग की टीम ने बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे मौके पर छापेमारी की। कार्रवाई शुरू होते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई।
बायोडीजल की आड़ में बिक रहा था असली डीजल
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बायोडीजल के नाम पर असली डीजल की बिक्री की जा रही थी, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा था। यह पूरा कारोबार सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।

900 लीटर डीजल व मशीनें बरामद
टीम ने मौके से करीब 900 लीटर डीजल, एक अवैध फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए। किसी भी प्रकार का वैध दस्तावेज मौके पर मौजूद नहीं पाया गया।
सेल्समैन ने कबूला तीन महीने से चल रहा था कारोबार
मौके पर मौजूद व्यक्ति ने अपना नाम तामीर मियां पुत्र आमिर मियां, निवासी दलपतपुर बताया। उसने लिखित बयान में स्वीकार किया कि वह पिछले करीब तीन महीनों से सैलरी बेस पर सेल्समैन के रूप में काम कर रहा था। कारोबार के असली संचालक को लेकर जांच जारी है।

गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि पूर्ति विभाग की तहरीर पर थाना मुंढापांडे में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना अनुमति और दस्तावेज पेट्रोल-डीजल बेचने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
गांव के बीच महीनों तक कैसे चलता रहा फर्जी पेट्रोल पंप?
क्या स्थानीय स्तर पर किसी की मिलीभगत थी?
क्या अवैध पेट्रोल-डीजल माफिया का नेटवर्क इससे कहीं बड़ा है?

जांच जारी, बड़े खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पूर्ति विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। डीजल के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे व गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
यह कार्रवाई सिर्फ एक फर्जी पेट्रोल पंप को सील करने तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे अवैध पेट्रोल-डीजल माफिया के खिलाफ कड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
