अमरोहा। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में बढ़ता प्रदूषण अब पर्यावरण ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। ज़हरीले भूजल और वायु प्रदूषण के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य धर्मपाल सिंह खडकवंशी ने चेतावनी देते हुए कहा कि विकास की मौजूदा सोच में शुद्ध वातावरण की अनदेखी आम जनता की सेहत के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

ज़मीनी पानी के प्रदूषित होने के विरोध में किसानों का बेमियादी धरना बृहस्पतिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। दिल्ली–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-09 स्थित गजरौला क्षेत्र के शहबाजपुर डोर में धरने को समर्थन देते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर वर्षों से काग़ज़ी दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निगरानी तंत्र प्रभावी होता, तो प्रदूषण का स्तर लगातार क्यों बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि ढीली कार्यप्रणाली और कमजोर प्रवर्तन के चलते हालात बद से बदतर हो गए हैं। अब समय आ गया है कि प्रदूषण को आपात स्थिति मानते हुए त्वरित जांच कर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। क्षेत्र के रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण आसपास के गांवों का भूजल प्रदूषित हो चुका है, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने ग्रेटर नोएडा में हुए एक हालिया शोध का हवाला देते हुए गजरौला की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में क्लीनिकल एपिजेनेटिक्स जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भूजल में क्रोमियम सामान्य से 60 गुना अधिक तथा कैडमियम घातक स्तर पर पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 64 प्रतिशत मरीजों के रक्त में कैंसर को बढ़ावा देने वाले जीन परिवर्तन पाए गए हैं, जो डीएनए को नुकसान पहुंचाकर किडनी, लीवर और फेफड़ों को धीरे-धीरे नष्ट करते हैं।

नरेश चौधरी ने कहा कि गजरौला में ऐसे वैज्ञानिक शोध की बेहद आवश्यकता है, क्योंकि यहां बीमारियों से जुड़े सार्वजनिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि रासायनिक कारखानों से होने वाले जल, वायु और मृदा प्रदूषण पर निगरानी के लिए एक व्यापक और पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाए, ताकि सटीक आंकड़ों के आधार पर ठोस कार्रवाई हो सके।

उन्होंने कहा कि गजरौला में प्रदूषण का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु, फसलें और संपूर्ण पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। “हमें विकास चाहिए, लेकिन सांसों की कीमत पर नहीं,” उन्होंने दो टूक कहा।
गुरुवार को भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-09 पर राहगीरों को प्रदूषित पानी की बोतलें बांटकर इस गंभीर मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की अपील की।

इस अवसर पर राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, रामकृष्ण चौहान, अमरजीत देओल, सुशील चौधरी, चौधरी चरण सिंह, राहुल सिद्धू, शान चौधरी, मनजीत चौधरी, अमित सिद्धू, जरार चौधरी, ईशान चौधरी, साकिब चौधरी, अमजद चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
