थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 20 दिनों तक चला भीषण सैन्य संघर्ष 27 दिसंबर 2025 को दोपहर 12:00 बजे (स्थानीय समय) से प्रभावी एक औपचारिक युद्धविराम (Ceasefire) समझौते के साथ समाप्त हो गया है।
युद्धविराम समझौता: थाईलैंड के रक्षा मंत्री नत्थाफोन नकफनिच और कंबोडिया के रक्षा मंत्री टी सिहा ने चंथाबुरी सीमा चौकी पर इस संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों सेनाएं अपनी वर्तमान स्थितियों पर बनी रहेंगी और कोई नई सैन्य आवाजाही नहीं करेंगी।
हताहत और मानवीय प्रभाव: इस 20 दिवसीय युद्ध में कम से कम 101 लोगों की मौत हुई है। संघर्ष के कारण सीमा के दोनों ओर से 5 लाख से अधिक लोग (कुछ रिपोर्टों के अनुसार लगभग 6.5 लाख से 10 लाख तक) विस्थापित हुए हैं।
विश्वास बहाली के कदम: समझौते के हिस्से के रूप में, यदि अगले 72 घंटों तक शांति बनी रहती है, तो थाईलैंड हिरासत में लिए गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को वापस सौंप देगा।
विवाद का मुख्य कारण: यह लड़ाई 8 दिसंबर 2025 को तब शुरू हुई जब जुलाई में हुआ पिछला युद्धविराम टूट गया। विवाद की जड़ प्राचीन हिंदू मंदिरों—प्रीह विहियर (Preah Vihear) और ता मुएन थोम (Ta Muen Thom) के आसपास के 4.6 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर संप्रभुता का दावा है।
धार्मिक तनाव: युद्ध के दौरान थाईलैंड द्वारा कंबोडियाई क्षेत्र में एक प्राचीन भगवान विष्णु की मूर्ति को नुकसान पहुँचाने की खबरों ने तनाव और अधिक बढ़ा दिया था, जिस पर भारत सरकार ने भी गहरी चिंता व्यक्त की थी।
निगरानी: आसियान (ASEAN) की एक पर्यवेक्षक टीम इस शांति समझौते के कार्यान्वयन और सीमा पर जमीनी स्थिति की निगरानी करेगी।
