भाकियू संयुक्त मोर्चा के धरने का नौवां दिन, किसानों ने नववर्ष उत्सव न मनाने का लिया संकल्प
गजरौला। गजरौला क्षेत्र में भूजल और वायु प्रदूषण से प्रभावित किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए किसानों ने नववर्ष का जश्न न मनाने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि जब क्षेत्र की हवा, पानी और मिट्टी ज़हरीली हो चुकी है, तब किसी भी प्रकार का उत्सव मनाना पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा होगा।
गौरतलब है कि गजरौला स्थित रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण फैल रहे प्रदूषण के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले शहबाजपुर डोर में स्थानीय किसानों का धरना सोमवार को नौवें दिन भी जारी रहा।
धरनारत किसानों ने आमजन से भी अपील की है कि वे नववर्ष के अवसर पर किसी प्रकार की खुशियां न मनाते हुए प्रदूषण पीड़ित किसानों के प्रति सहानुभूति और समर्थन प्रकट करें।
“हवा-पानी नहीं बचे तो खेती और इंसान दोनों खत्म हो जाएंगे”
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कहा कि यदि क्षेत्र की हवा, पानी और मिट्टी को जल्द शुद्ध नहीं किया गया, तो इंसान का शरीर ही काम करने लायक नहीं बचेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इंसानी फेफड़े ही सांस नहीं ले पाएंगे, तो खेतों में उत्पादकता कैसे होगी और ऐसी पीढ़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक पाएगी।

“नौ दिन बाद भी न जांच, न जवाबदेही”
अरुण सिद्धू ने कहा कि धरने को नौ दिन बीत जाने के बावजूद न तो प्रदूषण की निष्पक्ष जांच हुई है और न ही जिम्मेदारी तय की गई है। प्रदूषण से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक न होना यह दर्शाता है कि सरकार जनता की आवाज़ को अनसुना कर रही है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि गजरौला को एक तरह का “विकसित नरक” बना दिया गया है, जहां न मांग की अनुमति है, न विरोध का अधिकार और न ही सुनवाई की कोई व्यवस्था।
“शुद्ध हवा-पानी भी अब ‘लक्जरी’ बना दिया गया”
किसान नेता ने आरोप लगाया कि आज के दौर में यदि कोई व्यक्ति हवा और पानी को शुद्ध रखने के लिए एयर प्यूरीफायर या आरओ खरीदता है, तो उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। उन्होंने इसकी तुलना अंग्रेजी शासनकाल के नमक कर से करते हुए कहा कि तब दो पैसे के टैक्स पर देश में आंदोलन खड़ा हो गया था, लेकिन आज शुद्ध हवा और पानी पर टैक्स को सामान्य मान लिया गया है।
ईंधन, बिजली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल
अरुण सिद्धू ने पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों, स्मार्ट मीटर, बिजली पर टैक्स और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समग्र और प्रभावी स्वास्थ्य तंत्र आज भी सिर्फ एक सपना बना हुआ है।
धरने में ये किसान नेता रहे मौजूद
धरने में प्रमुख रूप से
रामकृष्ण चौहान, कैलाश नाथ, धीरज उपाध्याय, शान चौधरी, हैदर चौधरी, अनीफ गुजर, खुर्शीद अहमद, अंकुर चौधरी, राजीव चौधरी, जीराज सिंह पाल, सुरेश सिंह, फरमान चौधरी, बाबू खां सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
