दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने लालू प्रसाद यादव की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों और चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का पक्ष सुने बिना ट्रायल की कार्यवाही पर अंतरिम रोक नहीं लगाई जा सकती।
- CBI को नोटिस: अदालत ने लालू यादव की याचिका पर CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी, 2026 को होगी।
निचली अदालत का पिछला आदेश
- आरोप तय (October 2025): 13 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की धाराओं (आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय किए थे।
- कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और IRCTC होटलों के टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
IRCTC घोटाला क्या है?
- मामला: यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के दो होटलों (पूरी और रांची) के रखरखाव का ठेका निजी कंपनी ‘सुजाता होटल्स’ को देने के बदले में पटना में कीमती जमीन ली गई थी।
- क्विड प्रो क्वो (Quid Pro Quo): CBI के अनुसार, यह अनुबंध देने के एवज में पटना में 3 एकड़ जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए लालू परिवार को बहुत कम कीमत पर ट्रांसफर की गई थी।
